




भटनेर पोस्ट डेस्क
दीपों की स्वर्णिम आभा, गुरु वंदना के मधुर स्वर, पुष्पों की सुगंध और श्रद्धा से झुके विद्यार्थियों के शीश। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय के पास स्थित गुड डे डिफेंस स्कूल का वातावरण गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय संस्कृति के उन कालजयी मूल्यों का साक्षी बन गया, जिनमें गुरु को ज्ञान का दीप और जीवन का पथप्रदर्शक माना गया है। विद्यालय परिसर में हर ओर श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का ऐसा भाव था, जिसने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को सजीव कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं गुरु वंदना से हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का तिलक लगाकर, पुष्प अर्पित कर तथा चरण स्पर्श कर उनका सम्मान किया। गुरु के प्रति समर्पण और श्रद्धा का यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायी बन गया। विद्यार्थियों के चेहरों पर सम्मान और शिक्षकों की आंखों में आत्मीयता का भाव इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रहा।

विद्यालय के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जुनेजा ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘गुरु केवल ज्ञान के स्रोत ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के सच्चे शिल्पकार होते हैं। गुरु का सम्मान करना हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे महान परंपराओं में से एक है। गुरु के मार्गदर्शन से ही विद्यार्थी जीवन में सफलता और उत्कृष्टता प्राप्त करता है।’ उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों के प्रति सदैव सम्मान और विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।
विद्यालय के चेयरपर्सन वरुण यादव ने कहा, ‘एक श्रेष्ठ गुरु अपने विद्यार्थियों में केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्रसेवा की भावना का भी विकास करता है। गुरु का सान्निध्य ही विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा प्रदान करता है।’ उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मार्गदर्शन ही विद्यार्थियों को उत्कृष्ट नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।
विद्यालय की प्राचार्या मीनाक्षी शर्मा ने कहा, ‘गुरु के मार्गदर्शन, अनुशासन एवं आशीर्वाद से ही विद्यार्थी अपने जीवन के प्रत्येक लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। गुरु का सम्मान करना और उनके बताए मार्ग पर चलना प्रत्येक विद्यार्थी का नैतिक दायित्व है।ष्’उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कारों को भी जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।
विद्यालय के प्रशासक अनुराग छाबड़ा ने कहा, ‘गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता एवं समर्पण की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। हमें अपने शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान और संस्कारों को जीवन में आत्मसात कर एक जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लेना चाहिए।’
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने गुरु वंदना, प्रेरणादायक भाषण, कविता पाठ और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा, भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा तथा गुरु के जीवन में महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। हर प्रस्तुति में श्रद्धा, भावनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिस पर उपस्थित जनों ने तालियों की गड़गड़ाहट से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके आदर्शों पर चलकर ज्ञान, अनुशासन, संस्कार तथा राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। पूरे विद्यालय परिसर में भारतीय संस्कृति, गुरु-भक्ति और नैतिक मूल्यों का ऐसा वातावरण निर्मित हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि बदलते समय में भी गुरु का स्थान सर्वाेच्च है। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और कृतज्ञता का जीवंत उत्सव बन गया।









