August 20, 2026

दस्तक

गोपाल झागांव में एक बात बड़े-बूढ़े अक्सर कहते थे, ‘जब बेटा बाप की जूती पहनने लगे, तब...
गोपाल झापत्रकारिता कभी सत्ता की परछाईं नहीं रही, वह हमेशा उसका आइना रही है। आइना सच दिखाता...
गोपाल झा.अख़बार से मेरा रिश्ता कब बना, यह याद नहीं। जैसे कोई नदी चुपचाप ज़मीन के नीचे...
गोपाल झा.यह दृश्य अपने आप में प्रतीकात्मक था। मंच पर ‘आधुनिक पुलिसिंग’ की चर्चा होनी थी, प्रस्तुति-पट्टिकाओं...
गोपाल झा.यह दौर काग़ज़ से फिसलकर स्क्रीन पर आ चुका है। स्याही की खुशबू अब नोटिफिकेशन की...