




डॉ. संतोष राजपुरोहित.
21वीं सदी में जन्मी ‘जेन जी’ अर्थात लगभग 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं की पीढ़ी, आज वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और गति को प्रभावित कर रही है। यह पीढ़ी डिजिटल तकनीक के साथ बड़ी हुई है, इसलिए इसकी आर्थिक सोच, उपभोग की आदतें, रोजगार की प्राथमिकताएँ और निवेश का दृष्टिकोण पूर्ववर्ती पीढ़ियों से काफी भिन्न है। जेन जी का अर्थशास्त्र केवल आय और व्यय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, सामाजिक समावेशन तथा वित्तीय स्वतंत्रता जैसे तत्व भी शामिल हैं। यही कारण है कि आधुनिक अर्थशास्त्री जेन जी को ‘डिजिटल उपभोक्ता और डिजिटल उत्पादक’ दोनों के रूप में देखते हैं।
जेन जी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के युग में विकसित हुई है। इसलिए इसकी अधिकांश आर्थिक गतिविधियाँ ऑनलाइन माध्यमों से संचालित होती हैं। वस्तुओं की खरीद-बिक्री, बैंकिंग, भुगतान, शिक्षा, मनोरंजन और निवेश जैसे कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाते हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों, ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों तथा डिजिटल सेवाओं का तीव्र विस्तार इसी पीढ़ी की बदलती आवश्यकताओं का परिणाम है। डिजिटल लेन-देन की सहजता ने समय और लागत दोनों की बचत की है तथा बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।

रोजगार के क्षेत्र में भी जेन जी की सोच पारंपरिक नौकरी की अवधारणा से अलग है। यह पीढ़ी केवल स्थायी सरकारी या निजी नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि स्टार्टअप, फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन, डिजिटल मार्केटिंग, यूट्यूब, पॉडकास्टिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यों को भी समान महत्व देती है। अनेक युवा एक साथ कई स्रोतों से आय अर्जित करने में विश्वास रखते हैं। इस प्रकार ‘गिग अर्थव्यवस्था’ और ‘क्रिएटर इकोनॉमी’ का विस्तार जेन जी की आर्थिक सोच का प्रत्यक्ष परिणाम है।
उपभोग के क्षेत्र में जेन जी का व्यवहार भी उल्लेखनीय रूप से भिन्न है। यह पीढ़ी केवल उत्पाद की कीमत पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, ब्रांड की विश्वसनीयता, पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक उत्तरदायित्व पर भी ध्यान देती है। ऐसे उत्पादों और कंपनियों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है जो टिकाऊ विकास, हरित उत्पादन तथा नैतिक व्यापार का पालन करती हों। परिणामस्वरूप व्यवसायों को भी अपनी उत्पादन एवं विपणन रणनीतियों में पारदर्शिता, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को शामिल करना पड़ रहा है।

वित्तीय दृष्टि से जेन जी पहले की तुलना में अधिक जागरूक मानी जाती है। यह बचत के साथ-साथ निवेश के नए विकल्पों जैसे म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड,डिजिटल गोल्ड तथा शेयर बाजार में रुचि ले रही है। मोबाइल एप्लिकेशन और ऑनलाइन वित्तीय शिक्षा के कारण निवेश संबंधी जानकारी पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो गई है। यद्यपि जोखिम लेने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक है, फिर भी यह पीढ़ी दीर्घकालिक वित्तीय स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण मानती है।
जेन जी का अर्थशास्त्र नवाचार और उद्यमिता को भी प्रोत्साहित करता है। कम पूंजी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नया व्यवसाय प्रारंभ करना आज पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हो गया है। सोशल मीडिया विपणन, ऑनलाइन सेवाएँ और वैश्विक ग्राहकों तक सीधी पहुँच ने छोटे उद्यमों के लिए नए अवसर उत्पन्न किए हैं। इससे रोजगार सृजन, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास को भी नई गति मिली है।

हालाँकि इस आर्थिक मॉडल के सामने अनेक चुनौतियाँ भी हैं। सोशल मीडिया से प्रभावित अत्यधिक उपभोग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, अस्थायी रोजगार, आय की अनिश्चितता तथा डिजिटल असमानता जैसी समस्याएँ तेजी से उभर रही हैं। इसके अतिरिक्त, लगातार बदलती तकनीकों के कारण कौशलों का शीघ्र अप्रासंगिक होना भी एक बड़ी चुनौती है। इसलिए आजीवन सीखने और कौशल विकास का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में जेन जी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है, जहाँ विशाल युवा जनसंख्या डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। सरकार की डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलें भी इस पीढ़ी की क्षमता को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। यदि इन युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, तो वे भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में निर्णायक योगदान दे सकते हैं।

जेन जी का अर्थशास्त्र केवल नई पीढ़ी की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह डिजिटल परिवर्तन, नवाचार, उद्यमिता, वित्तीय जागरूकता और सतत विकास पर आधारित एक नई आर्थिक व्यवस्था का प्रतीक है। यह पीढ़ी उपभोक्ता, निवेशक, उद्यमी और नवप्रवर्तककृचारों भूमिकाओं में अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। भविष्य की आर्थिक नीतियों, शिक्षा प्रणाली और रोजगार रणनीतियों को जेन जी की अपेक्षाओं और क्षमताओं के अनुरूप ढालना ही सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास की कुंजी सिद्ध होगा।
-लेखक भारतीय आर्थिक परिषद के सदस्य हैं






