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हनुमानगढ़ जिले के नगर निकाय आम चुनाव में जैसे ही शाम को मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई और मतपेटियों का सियासी भाग्य ईवीएम में बंद हुआ, ठीक उसी पल से लोकतंत्र के इस उत्सव ने एक अलग ही रणनीतिक मोड़ ले लिया। जनता ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर फैसला सुरक्षित रख दिया है, लेकिन राजनीतिक दलों के चुनावी दफ्तरों में जश्न मनाने के बजाय भारी सतर्कता और अविश्वास का माहौल देखने को मिल रहा है। कड़े मुकाबले और संभावित त्रिशंकु नतीजों की आशंका ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और स्थानीय विधायक गणेशराज बंसल गुट की धड़कनें बढ़ा दी हैं। नतीजों की घोषणा में भले ही समय बाकी हो, लेकिन किसी भी संभावित खरीद-फरोख्त या सेंधमारी से अपने कुनबे को बचाने के लिए जिले में रातों-रात ‘ऑपरेशन बाड़ेबंदी’ शुरू कर दिया गया है।
कांग्रेस की रणनीति, विशेष बसों से हिमाचल की वादियों में रवानगी
मतदान समाप्त होते ही कांग्रेस संगठन तुरंत एक्शन मोड में आ गया। पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों ने गुप्त बैठकों का दौर शुरू किया और चुनावी गुणा-भाग के आधार पर यह तय किया गया कि किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। देर रात ही पार्टी के अधिकृत व संभावित विजेता प्रत्याशियों को विशेष बसों में सवार कर जिले की सीमाओं से बाहर भेज दिया गया। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए हिमाचल प्रदेश के शांत और सुरक्षित ठिकानों को चुना है। पार्टी नेतृत्व लगातार इन प्रत्याशियों के संपर्क में है और मतगणना के दिन तक इन सभी को बाहरी दबाव और संपर्क से पूरी तरह दूर रखने की पुख्ता व्यवस्था की गई है। हालांकि पार्टी को झटका लगा जब दो प्रत्याशी मतदान के बाद ‘लापता’ हो गए। उनके बंसल गुट में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।
विधायक खेमे की अग्रिम तैयारी, मंडावा में दो माह पहले से बुकिंग
निर्दलीय और अपने समर्थक उम्मीदवारों के दम पर नगर निकाय की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रहे स्थानीय विधायक गणेशराज बंसल ने कोई ढिलाई नहीं बरती। बताया जा रहा है कि इस राजनीतिक स्थिति का पूर्वाभास विधायक खेमे को काफी पहले से था, जिसके चलते लगभग दो महीने पहले ही राजस्थान के ऐतिहासिक शहर मंडावा में एक पूरा रिसॉर्ट अग्रिम रूप से बुक करवा लिया गया था। मतदान खत्म होने से पहले ही प्रत्याशियों को अपने जरूरी सामान के साथ तैयार रहने के निर्देश थे। जैसे ही वोटिंग संपन्न हुई, सभी उम्मीदवारों को एक तय केंद्र पर इकट्ठा किया गया और फिर वहां से सुरक्षित गाड़ियों के काफिले के साथ मंडावा के लिए रवाना कर दिया गया। हालांकि ऐन वक्त पर जगह बदलने की भी चर्चा है।
भाजपा का पैंतरा, ‘प्रशिक्षण शिविर’ के नाम पर एकजुटता
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी का संगठन भी अपने प्रत्याशियों को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। किसी भी तरह के राजनीतिक बवंडर और दबाव से बचने के लिए भाजपा नेतृत्व ने प्रत्याशियों को व्यक्तिगत स्तर पर फोन कर ‘प्रशिक्षण शिविर’ में शामिल होने का संदेश दिया। इस कवायद के तहत प्रत्याशियों को पहले एक तय स्थल पर जुटाया गया, जहां से उन्हें योजनाबद्ध तरीके से सुरक्षित और अज्ञात ठिकानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पार्टी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विरोधी खेमा किसी भी प्रत्याशी से सीधा संवाद न साध सके।
नजदीकी मुकाबला और सत्ता की चाबी का खेल
इस अप्रत्याशित और त्वरित बाड़ेबंदी की असली वजह कई वार्डों में होने वाली सीधी और कांटे की टक्कर है। जानकारों का मानना है कि इस बार किसी भी एक पक्ष को पूर्ण बहुमत मिलना आसान नहीं लग रहा है। ऐसे हालात में बोर्ड के गठन के लिए हर एक पार्षद की भूमिका बेहद अहम हो जाएगी। इसी डर से परिणाम आने से करीब 48 घंटे पहले ही प्रत्याशियों को एक तरह से भूमिगत कर दिया गया है। अब ये तमाम चेहरे सीधे 14 सितंबर को मतगणना केंद्र पर ही नजर आएंगे, जहां ईवीएम की सील टूटने के साथ ही यह साफ होगा कि जनता ने नगर निकाय की चाबी असल में किसे सौंपी है।







