








सतीश गर्ग
नगरपालिका चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद संगरिया की स्थानीय राजनीति में अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बोर्ड बनाने की होड़ के बीच पांच विजयी निर्दलीय पार्षदों ने एकजुट होकर औपचारिक रूप से ‘तीसरे मोर्चे’ के गठन का ऐलान कर दिया है। इस कदम ने नगर परिषद की सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने की दौड़ को बेहद रोचक बना दिया है। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद उभरे इस नए शक्ति केंद्र में पांच वार्डों के विजयी निर्दलीय पार्षदों ने अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई है। इनमें वार्ड नंबर 5 से निर्मला देवी (प्रमुख समर्थक सूर्यप्रकाश वर्मा), वार्ड नंबर 18 से मनीष गोयल (प्रमुख समर्थक आनंद गोयल), वार्ड नंबर 27 से अनिल भोभिया, वार्ड नंबर 32 से सुमन शर्मा (प्रमुख समर्थक गजेंद्र शर्मा) व वार्ड नंबर 33 से तेजिंदर कौर सलवारा (प्रमुख समर्थक सुखराज सलवारा) प्रमुख हैं। इन पांचों पार्षदों के एक मंच पर आने से स्थानीय स्तर पर नया सियासी ध्रुवीकरण शुरू हो गया है, जिसने स्थापित राजनीतिक दलों की प्राथमिक योजनाओं को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
नगरपालिका बोर्ड गठन के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए मुख्य दलों को अतिरिक्त समर्थन की दरकार है। ऐसे में पांच पार्षदों का यह संगठित ब्लॉक एक मजबूत ‘किंगमेकर’ की हैसियत में आ चुका है। बिखरे हुए निर्दलीयों से अलग-अलग बातचीत करने की तुलना में एकमुश्त पांच पार्षदों के समूह से निपटना राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
तीसरे मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि उनका गठबंधन किसी पद की सौदेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य शहर का सर्वांगीण विकास और नागरिक समस्याओं का त्वरित समाधान है। मोर्चे के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी जवाबदेही सिर्फ अपने वार्ड तक सीमित नहीं रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि शहर के विकास की सोच रखने वाले अन्य विजयी पार्षदों के लिए भी इस मोर्चे के दरवाजे पूरी तरह खुले हैं।
मोर्चे द्वारा अन्य पार्षदों को दिए गए खुले न्योते ने राजनीतिक दलों के खेमों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मोर्चा अपनी संख्या 5 से आगे बढ़ा पाएगा। यदि कुछ और निर्दलीय या असंतुष्ट पार्षद इस मंच से जुड़ते हैं, तो बोर्ड गठन के पूरे समीकरण पलट सकते हैं। आगामी दिनों में होने वाली पार्षदों की बैठकें और रणनीतिक बातचीत शहर के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेंगी।
संगरिया के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य केंद्र यही है कि यह मोर्चा स्वतंत्र रहकर अपना प्रभाव बनाए रखेगा या बोर्ड गठन के समय किसी एक राजनीतिक दल के साथ औपचारिक समझौता करेगा। दोनों ही परिस्थितियों में मोर्चे की सहमति के बिना बोर्ड गठन की राह आसान नहीं होगी। फिलहाल पांच पार्षदों से शुरू हुआ यह तीसरा मोर्चा निकाय राजनीति का सबसे प्रभावी और निर्णायक कारक बन चुका है।







