




भटनेर पोस्ट चुनाव डेस्क
हनुमानगढ़ जिले में प्रस्तावित नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। लंबे समय से चुनावी तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों की निगाहें अब आरक्षण की लॉटरी पर टिक गई हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया 15 अगस्त से पहले पूरी किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग 17 अगस्त के आसपास नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ तो सितंबर के तीसरे सप्ताह तक नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद 23 सितंबर के आसपास पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों की घोषणा की जा सकती है। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग का लक्ष्य 15 नवंबर तक संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया पूरी करने का बताया जा रहा है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम आयोग की अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

इस बार हनुमानगढ़ जिले में पहली बार आठ शहरी निकाय क्षेत्रों में चुनाव कराए जाएंगे। इनमें हनुमानगढ़, संगरिया, टिब्बी, भादरा, नोहर, रावतसर, पीलीबंगा और गोलूवाला शामिल हैं। चुनावी माहौल बनने के साथ ही इन सभी क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों ने जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। कई दावेदार पिछले कई महीनों से वार्डों में बैठकें, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी और घर-घर संपर्क के माध्यम से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
लेकिन चुनावी तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल आरक्षण का है। संभावित प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित वार्ड या अध्यक्ष पद किस श्रेणी में आरक्षित होता है। कई ऐसे दावेदार हैं, जिन्होंने लंबे समय से चुनाव की तैयारी की है, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी तरह आरक्षण की लॉटरी पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण सूची जारी होने के बाद कई समीकरण एक झटके में बदल सकते हैं।

निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ग्राम पंचायतों में वार्ड पंच और सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी संबंधित उपखंड अधिकारी निकालेंगे। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य पदों का आरक्षण जिला कलक्टर की ओर से तय किया जाएगा। वहीं नगर निकायों में पार्षद और अध्यक्ष पदों का आरक्षण भी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से निर्धारित होगा। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया की तैयारियां शुरू होने की चर्चा है।
चुनावी नियमों के अनुसार सभी वर्गों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण भी निर्धारित नियमों के अनुसार लॉटरी से किया जाएगा। महिला वर्ग में भी प्रत्येक आरक्षित श्रेणी के लिए अलग-अलग आरक्षण लागू होगा। ऐसे में कई वार्डों का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

सूत्रों के अनुसार आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक दल भी टिकट वितरण की कवायद तेज कर देंगे। अभी अधिकांश दल संभावित उम्मीदवारों के फीडबैक जुटाने में लगे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय आरक्षण सूची आने के बाद ही लिया जाएगा। यही वजह है कि कई नेता फिलहाल अपने मूल वार्ड के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी सक्रियता बनाए हुए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर चुनावी रणनीति बदली जा सके।

जिले के विभिन्न शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में चुनावी बैठकें लगातार आयोजित हो रही हैं। संभावित उम्मीदवार समर्थकों के साथ संवाद बढ़ा रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर पुराने और नए चेहरों के बीच टिकट की दावेदारी को लेकर अंदरूनी खींचतान भी सामने आने लगी है। स्थानीय स्तर पर सामाजिक समीकरणों और जातीय संतुलन को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण की लॉटरी घोषित होते ही जिले की चुनावी तस्वीर बदल सकती है। कुछ दावेदारों को नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं, जबकि कई नए चेहरे अचानक मजबूत दावेदार बनकर उभर सकते हैं। यही कारण है कि फिलहाल सभी की नजरें आरक्षण सूची पर टिकी हुई हैं। आने वाले दो से तीन सप्ताह हनुमानगढ़ की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो अगस्त के दूसरे पखवाड़े से जिले में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म होने की संभावना है।






