



भटनेर पोस्ट ब्यूरो
राजधानी जयपुर में 1 जुलाई को डीएनटी (घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू) समाज के कथित शांतिपूर्ण आंदोलन पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ अब मूल ओबीसी समाज खुलकर मैदान में आ गया है। मूल ओबीसी समाज के नेता सुरेंद्र मारवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है, जिसमें घटना को लोकतंत्र और संविधान की भावना के विरुद्ध बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्र के मुताबिक, 1 जुलाई को डीएनटी समाज के लोग जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम के सामने अपने संवैधानिक अधिकारों और 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करवाने की मांग को लेकर पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। यह आंदोलन न तो हिंसक था और न ही कानून-व्यवस्था के लिए कोई खतरा। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिससे महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित कई लोग घायल हो गए।
मूल ओबीसी समाज ने इस कार्रवाई को न केवल डीएनटी समाज पर हमला, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की गरिमा पर सीधा प्रहार बताया है। पत्र में सवाल उठाया गया है कि यदि कोई समाज अपने अधिकारों की मांग शांतिपूर्ण ढंग से करता है, तो क्या यह अपराध की श्रेणी में आता है? जब संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है, तो फिर इस तरह की अमानवीय कार्रवाई क्यों की गई?
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मूल ओबीसी और बंजारा समाज, डीएनटी समाज की न्यायोचित मांगों के समर्थन में मजबूती से खड़ा है। समाज का कहना है कि यह समर्थन किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि न्याय, समानता और सामाजिक सम्मान के लिए है। अगर आज एक वर्ग के साथ अन्याय होता है और बाकी समाज चुप रहता है, तो कल वही अन्याय दूसरों तक भी पहुंच सकता है।
मूल ओबीसी समाज ने मुख्यमंत्री से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, लाठीचार्ज और आंसू गैस की घटना की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। दूसरी, इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाएं। तीसरी, घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। चौथी, डीएनटी समाज की 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर शीघ्र निर्णय लेकर उसे लागू किया जाए। पांचवीं, भविष्य में शांतिपूर्ण आंदोलनों पर बल प्रयोग रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
पत्र में चेतावनी भी दी गई है कि यदि इन जायज मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो मूल ओबीसी समाज और डीएनटी समाज मिलकर पूरे राजस्थान में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन को और व्यापक करेंगे। समाज का कहना है कि वे अन्याय और दमन के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
सुरेंद्र मारवाल ने पत्र में दो टूक शब्दों में कहा है कि ‘लाठियां हौसले नहीं तोड़ सकतीं और न ही झूठ व धमकियां आवाज दबा सकती हैं। अधिकार लेकर रहेंगे, क्योंकि न्याय हमारा संवैधानिक अधिकार है।’ इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब निगाहें राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।









