



भटनेर पोस्ट डेस्क
5 जुलाई यानी रविवार का दिन, वैदिक मंत्रों की गूंज, अग्निकुंड से उठती सुगंधित हवाएं और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष। हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित जाट भवन में कुछ ऐसा ही दिव्य दृश्य साकार हुआ। सात दिनों तक चले श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। हवन-यज्ञ में आहुतियां अर्पित करते श्रद्धालु, भाव-विभोर चेहरे और भक्तिमय वातावरण। यह आयोजन सामूहिक आस्था का जीवंत उत्सव बन गया।
हवन-यज्ञ में पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप, भाजपा नेता अमित चौधरी, हरीश सहू, पूर्व सभापति राज कुमार हिसारिया, सुरेंद्र बलाड़िया, ओम सोनी, साहिल बलाड़िया, दीपक खाती सहित अन्य मुख्य यजमानों ने विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति अर्पित की। वैदिक ऋचाओं और मंत्रोच्चार के बीच सभी ने प्रदेश एवं क्षेत्रवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। हवन के दौरान अग्निदेव को समर्पित आहुतियों के साथ वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया।

कथा व्यास आचार्य दयानंद शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की अमर मित्रता का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा-श्रीकृष्ण की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, विश्वास, समर्पण और आत्मीयता का अनुपम उदाहरण है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र का जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ स्वागत किया, वह यह संदेश देता है कि ईश्वर के दरबार में धन-दौलत नहीं, बल्कि सच्ची भावना और प्रेम का ही महत्व होता है। इस प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और कई की आंखें नम हो गईं।

अपने अंतिम प्रवचन में आचार्य दयानंद शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण के सार पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत मानव जीवन को धर्म, भक्ति, सत्य, सेवा, करुणा और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसके नियमित श्रवण और मनन से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के पापों का क्षय होता है, मन को शांति मिलती है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ज्ञान है।
आयोजन समिति ने कथा के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, यजमानों, सहयोगकर्ताओं एवं सेवाभाव से जुड़े कार्यकर्ताओं का आभार जताया। सात दिनों तक चला यह धार्मिक आयोजन हनुमानगढ़ जंक्शन क्षेत्र में आस्था, एकता और आध्यात्मिक चेतना का स्थायी संदेश छोड़ गया।






