






भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हाथों में तख्तियां, बुलंद नारों की गूंज, शिक्षा बचाने और निजी विद्यालयों के सम्मान की मांग करते हजारों शिक्षकों व विद्यालय संचालकों का अनुशासित जनसैलाब 15 जुलाई को हनुमानगढ़ की सड़कों पर उमड़ पड़ा। जिले की लगभग 1050 निजी शिक्षण संस्थाओं ने अपने विद्यालय बंद रखकर जाट भवन से जिला कलेक्ट्रेट तक विशाल रोष मार्च निकाला। मार्च के दौरान शिक्षा संबलन योजना के तहत प्रस्तावित विशेष जांच को निरस्त करने की मांग प्रमुखता से उठी। जिले भर के प्राइवेट स्कूल बंद होने से लाखों स्टूडेंट्स की पढ़ाई बाधित हुई। इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया।
प्रदर्शनकारियों ने जिला कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपा। धरना स्थल पर भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित चौधरी पहुंचे और विद्यालय संचालकों से ज्ञापन लेकर उनकी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष मजबूती से रखने का आश्वासन दिया। इसके बाद सभी विद्यालय संचालक विधायक गणेशराज बंसल के निवास पहुंचे और उन्हें भी ज्ञापन सौंपकर समर्थन मांगा।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, राजस्थान द्वारा 3 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार राजएप के माध्यम से शिक्षा संबलन कार्यक्रम के अंतर्गत निजी शिक्षण संस्थाओं की विशेष जांच प्रस्तावित की गई है, जिसका राजस्थान प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना था कि शिक्षा संबलन योजना मूल रूप से राजकीय विद्यालयों के उन्नयन, उनकी आवश्यकताओं के आकलन तथा योजनाओं और बजट निर्धारण के लिए संचालित की जाती है। निजी विद्यालयों को सरकार से किसी प्रकार का अनुदान, योजना अथवा बजटीय सहायता प्राप्त नहीं होती, इसलिए उन्हें इस योजना के दायरे में लाकर विशेष जांच करना न्यायोचित नहीं है।

ज्ञापन में कहा गया कि निजी शिक्षण संस्थाएं पूर्णतः स्वायत्तशासी हैं और निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी प्रबंधन समितियों द्वारा संचालित होती हैं। बिना किसी आर्थिक सहायता के संचालित इन संस्थाओं पर अतिरिक्त जांच का बोझ डालने से शैक्षणिक कार्य प्रभावित होगा तथा संचालकों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा। विद्यालय संचालकों ने बताया कि प्रदेश में लगभग 33 हजार निजी शिक्षण संस्थाएं सीमित संसाधनों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष निजी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन पहले से ही किया जाता है तथा सभी मानकों की जांच के बाद ही भुगतान जारी होता है। यदि इसके अतिरिक्त प्रतिमाह निरीक्षण की व्यवस्था लागू की जाती है तो विद्यालयों का पूरा ध्यान शिक्षा से हटकर कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह जाएगा।
ज्ञापन में पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत भुगतान को पूर्व की भांति नियमित रूप से जारी रखने की मांग भी की गई। संचालकों का कहना था कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से निजी विद्यालय आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से निदेशक माध्यमिक शिक्षा के आदेश पर पुनर्विचार कर उसे वापस लेने की मांग की, ताकि निजी शिक्षण संस्थाएं राहत के साथ राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अपना योगदान निरंतर देती रहें।

इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा, प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय, जिला अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा, जिला महासचिव भारत भूषण कौशिक, जिला महासचिव अशोक सुधार, संगठन मंत्री राजेश मिड्ढा, हनुमानगढ़ तहसील अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह, हनुमानगढ़ तहसील अध्यक्ष विजय सिंह चौहान, भादरा तहसील अध्यक्ष राजाराम कस्वां, नोहर तहसील अध्यक्ष प्रदीप पुरोहित, टिब्बी तहसील अध्यक्ष नवनीत सिडाना, संगरिया तहसील अध्यक्ष हरचरण सिंह किगरा, पीलीबंगा तहसील अध्यक्ष भागीरथ सैन, रावतसर तहसील अध्यक्ष कैलाश सिंवर, गोलूवाला उपतहसील अध्यक्ष अनिल धारणिया तथा पल्लू उपतहसील अध्यक्ष ओम देग सहित जिलेभर के निजी विद्यालय संचालक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में एसोसिएशन पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजी शिक्षण संस्थाएं शिक्षा व्यवस्था की मजबूत साझेदार हैं और सरकार को उन्हें सहयोगी मानते हुए उनकी व्यावहारिक समस्याओं का शीघ्र समाधान करना चाहिए।






