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राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर पीठ ने हनुमानगढ़ के विधायक गणेश राज बंसल को एक मामले में बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि अदालत के आगामी आदेश के बिना विधायक को गिरफ्तार न किया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता विधायक को मामले की जांच में सहयोग करने और पुलिस जांच में शामिल होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की एकलपीठ द्वारा याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया।
हनुमानगढ़ जंक्शन पुलिस थाने में विधायक गणेश राज बंसल के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(3), 61(2) एवं 111(2)(इ) के तहत प्राथमिकी संख्या 669/2026 दर्ज की गई थी। इस प्राथमिकी को रद्द कराने की मांग को लेकर विधायक की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत राजस्थान उच्च न्यायालय में एक आपराधिक विविध याचिका दायर की गई। इस मामले में राज्य सरकार के अलावा जयपुर (वैशाली नगर) निवासी रिछपाल सिंह खर्रा पुत्र रतन लाल को प्रतिवादी संख्या 2 (शिकायतकर्ता) बनाया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी एवं अधिवक्ता कुणाल उपाध्याय ने अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण पक्ष रखे। याचिकाकर्ता लगभग 60 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नागरिक हैं और वर्तमान में हनुमानगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्हें राजनीतिक दुर्भावना और द्वेष के चलते शिकायतकर्ता व उसके साथियों द्वारा परेशान किया जा रहा है।
बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहाकि दर्ज कराई गई एफआईआर में याचिकाकर्ता द्वारा किसी को सीधे तौर पर धमकी देने का कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है। एफआईआर में मुख्य रूप से किसी हनी बॉक्सर द्वारा कथित रूप से धमकी दिए जाने की बात कही गई है। कथित तौर पर धमकी देने की घटना 3 जनवरी 2026 की बताई गई है, जबकि इसके करीब 10 महीने बाद पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। वकीलों ने तर्क दिया कि इतनी लंबी देरी के पीछे कोई उचित कारण नहीं दर्शाया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह मामला बाद में सोच-समझकर गढ़ा गया है। इसलिए यह प्राथमिकी निरस्त किए जाने योग्य है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और शिकायतकर्ता रिछपाल सिंह खर्रा की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने याचिका का पुरजोर विरोध किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर में अत्यंत गंभीर प्रकृति के अपराध दर्ज किए गए हैं। अभी जांच प्रारंभिक स्तर पर है और शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किया जाना बाकी है, इसलिए याचिकाकर्ता किसी भी प्रकार की राहत का हकदार नहीं है। शिकायतकर्ता के वकील ने माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा ‘मैसर्स नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य’ मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि गंभीर अपराधों की शुरुआती जांच में अदालतों को दखल देने या जांच रोकने से बचना चाहिए। साथ ही, अखबारों की कतरनें पेश करते हुए याचिकाकर्ता पर जमीन पर कब्जा करने (लैंड ग्रैबर) से जुड़े आरोप भी लगाए गए।
दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने तथा पत्रावली पर मौजूद रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता 60 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हैं और हनुमानगढ़ जिले के वर्तमान विधायक हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ता को जांच में शामिल होने के निर्देश के साथ संरक्षण देना उचित माना। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया याचिकाकर्ता को पुलिस जांच में शामिल होने का निर्देश दिया जाता है। हनुमानगढ़ जंक्शन पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 669/2026 के सिलसिले में अदालत के अगले आदेश तक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।








