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हनुमानगढ़ नगर परिषद की राजनीति में निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के गुट ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित किया है। नगर परिषद के उप सभापति चुनाव में विधायक गणेशराज बंसल की पुत्री सोनू बंसल विजयी रही हैं। सोनू बंसल ने 34 वोट हासिल कर उप सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमाया। वहीं, भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र पारीक की पत्नी सुनीता पारीक को 15 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार चंदन मोंगा 11 वोटों पर सिमट गए।
यदि सभापति चुनाव के आंकड़ों से तुलना की जाए तो निर्दलीय विधायक गुट और भाजपा दोनों के खाते से एक-एक वोट कम हुआ, जो सीधे कांग्रेस के पाले में चला गया। ज्ञात हो कि सभापति चुनाव में विधायक गुट को 35, भाजपा को 16 और कांग्रेस को 9 वोट मिले थे।
सोनू बंसल के उप सभापति बनने के बाद शहर के राजनीतिक गलियारों में विधायक गुट की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि विधायक गुट टाउन क्षेत्र के किसी पार्षद को यह पद सौंपेगा। उप सभापति पद की दौड़ में सोनल अग्रवाल, ज्योत्सना और प्रमोद सोनी के नाम प्रमुखता से चल रहे थे। राजनीतिक संतुलन के तहत माना जा रहा था कि सभापति यदि जंक्शन से हैं, तो उप सभापति टाउन से बनाया जाएगा।
हनुमानगढ़ के जिला बनने के बाद से ही जिला मुख्यालय पर ‘टाउन बनाम जंक्शन’ का मुद्दा समय-समय पर सुर्खियों में रहता है। ऐसे में विधायक की गैरमौजूदगी में उनकी पुत्री को मैदान में उतारने के फैसले को लेकर यह सवाल उठने लगा है कि क्या टीम गणेशराज ने इस क्षेत्रीय विवाद को फिर से हवा दे दी है?
रणनीतिकारों का कहना है कि विधायक की गिरफ्तारी के बाद उनके प्रति एकजुटता और समर्थन दिखाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया। विधायक गुट के प्रमुख सहयोगी मुकेश भार्गव के अनुसार, सरकार सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के जरिए गणेशराज बंसल पर दबाव बनाना चाहती है। ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि सरकार स्तर पर अब बोर्ड को अस्थिर करने का प्रयास किया जा सकता है। इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए उप सभापति के रूप में सोनू बंसल सभी पार्षदों की स्वाभाविक पसंद बनीं, ताकि वे अपने पिता की तरह निडर होकर परिषद का मोर्चा संभाल सकें।
दूसरी ओर, भाजपा सूत्रों का कहना है कि विधायक गणेशराज बंसल के खिलाफ जल्द ही कुछ और मुकदमे दर्ज हो सकते हैं, जिसकी तैयारी चल रही है। चर्चा है कि सरकार की मंशा पंचायतीराज चुनाव से पहले विधायक को कानूनी घेरे में रखने की है, ताकि समर्थकों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम पर नागरिक सुरक्षा मंच के संस्थापक शंकर सोनी का कहना है कि वर्तमान राजनीतिक खींचतान शहर और क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ की जनता जितनी शांत दिखती है, समय आने पर उतनी ही जागरूकता और एकजुटता के साथ जवाब देती है। 21 सितंबर के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जनता किसी भी अनुचित राजनीतिक दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में जिले की सियासत में और भी अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं।







