





भटनेर पोस्ट डॉट कॉम
हनुमानगढ़ जिले की आठ नगर निकायों में चुनावी रण अब धीरे-धीरे पूरी तरह गरमाने लगा है। कांग्रेस और भाजपा ने भले ही अभी अपने प्रत्याशियों के नामों का खुलासा नहीं किया हो, लेकिन दोनों दलों के संभावित दावेदारों ने अपने स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। वार्डों में जनसंपर्क, समर्थकों की लामबंदी और टिकट के लिए जोड़-तोड़ का दौर तेज हो गया है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही चुनावी तस्वीर भी धीरे-धीरे साफ होने लगी है। गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन जिले की आठ निकायों में 95 उम्मीदवारों ने कुल 114 नामांकन पत्र दाखिल किए। संगरिया में सबसे अधिक 32 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे, जबकि गोलूवाला में केवल एक नामांकन दाखिल हुआ। रावतसर और पीलीबंगा में 19-19, भादरा में 16, टिब्बी में 12 तथा हनुमानगढ़ नगरपरिषद क्षेत्र में 10 नामांकन पत्र जमा हुए। नोहर में पांच उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर असली रस्साकशी अब दिखाई देने लगी है। एक ओर संभावित प्रत्याशी अपने राजनीतिक संपर्कों के जरिए टिकट पक्का कराने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर वार्ड स्तर पर अपने प्रभाव और समर्थकों की संख्या दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

कई दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दरवाजे खटखटा रहे हैं। कुछ अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को आधार बना रहे हैं तो कुछ युवा चेहरों और सक्रिय जनसंपर्क को टिकट का मजबूत आधार बता रहे हैं। टिकट की दौड़ में एक-दूसरे के खिलाफ खेमेबंदी और समर्थन जुटाने का खेल भी चल रहा है। टिकट की घोषणा से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। वार्डों में घर-घर संपर्क, छोटी बैठकों और व्यक्तिगत मुलाकातों का दौर चल रहा है। दावेदार मतदाताओं के सुख-दुख में शामिल होने से लेकर स्थानीय समस्याओं को उठाने तक में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशी सामने आने के बाद यही जनसंपर्क अभियान चुनाव प्रचार में बदल जाएगा। ऐसे में आने वाले कुछ दिन प्रत्याशियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार अब 29 और 31 अगस्त को नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। रक्षाबंधन के अवकाश और रविवार के कारण बीच में नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस वजह से दावेदारों के पास नामांकन दाखिल करने के लिए सीमित अवसर हैं। पहले दिन निर्वाचन कार्यालयों में उम्मीदवार समर्थकों के साथ पहुंचे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्र जमा किए गए। कई स्थानों पर उम्मीदवारों के साथ समर्थकों की मौजूदगी ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया।

भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय दावेदार भी अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं। टिकट नहीं मिलने की स्थिति में कुछ संभावित दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे दोनों प्रमुख दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने भीतरघात और बागी उम्मीदवारों की चुनौती खड़ी हो सकती है। खासकर उन वार्डों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है, जहां पार्टी के भीतर एक से अधिक मजबूत दावेदार हैं। टिकट वितरण के बाद कुछ चेहरे भले ही पार्टी के साथ दिखाई दें, लेकिन उनके समर्थकों का रुख चुनावी परिणामों पर असर डाल सकता है।

पहले दिन दाखिल हुए 114 नामांकन पत्रों ने संकेत दे दिया है कि चुनावी मैदान अब पूरी तरह सजने लगा है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों की तस्वीर सामने आने के बाद ही वास्तविक मुकाबले का आकलन हो सकेगा।
फिलहाल दावेदार टिकट के लिए अंतिम जोर लगा रहे हैं और संभावित प्रत्याशी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में नामांकन की संख्या बढ़ने के साथ ही वार्डवार मुकाबले और राजनीतिक समीकरण भी अधिक स्पष्ट होंगे। अब नजर इस बात पर है कि दोनों प्रमुख दल किसे मैदान में उतारते हैं और टिकट से वंचित दावेदार पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हैं या चुनावी गणित में नया पेंच डालते हैं।






