




भटनेर पोस्ट डेस्क
रमा मेहता फाउंडेशन की ओर से 27 से 30 जुलाई तक उदयपुर में ‘रमा मेहता राइटिंग ग्रांट वर्कशॉप-2026’ का आयोजन किया जाएगा। चार दिवसीय इस कार्यशाला में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और राजस्थानी भाषा के चयनित नवोदित कहानीकारों को कहानी लेखन की बारीकियों और रचनात्मक शिल्प से परिचित कराया जाएगा। कार्यशाला का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बड़गांव, उदयपुर में होगा।
इस विशेष कार्यशाला में राजस्थानी कहानी के विशेषज्ञ और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कथाकार डॉ. भरत ओला राजस्थानी भाषा के मेंटर के रूप में नवोदित कहानीकारों का मार्गदर्शन करेंगे। उनके साथ उर्दू के लिए रहमान अब्बास, हिंदी के लिए अनु चौधरी और अंग्रेजी के लिए अर्पिता दास मेंटर की भूमिका में रहेंगे।
डॉ. ओला ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल कहानी लिखने का प्रशिक्षण देना नहीं बल्कि युवा रचनाकारों को कहानी की दृष्टि, कथ्य, पात्र, संवाद, भाषा, संरचना और रचनात्मक अनुशासन जैसे पहलुओं की व्यावहारिक समझ देना है। चयनित लेखक अपने लेखन का अभ्यास करेंगे और अनुभवी साहित्यकारों से उस पर संवाद व मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।
चार दिनों के दौरान मेंटर्स के विशेष सत्रों के अलावा संयुक्त पाठ और चर्चा भी होगी, जिसमें मेंटर्स अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे और प्रतिभागियों के साथ रचनात्मक संवाद करेंगे। 28 जुलाई को लेखिका एवं फूड हिस्टोरियन डॉ. तराना हुसैन खान के साथ ऑनलाइन संवाद भी प्रस्तावित है। प्रतिभागियों को सेवा मंदिर स्थित रमा मेहता रूम का भ्रमण भी कराया जाएगा।
29 जुलाई को चयनित नवोदित लेखक अपनी कहानियों का संयुक्त पाठ करेंगे। इसके बाद उदयपुर के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अतिथियों के साथ संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया है। 30 जुलाई को लेखन अभ्यास और मेंटर्स के अंतिम सत्र के बाद कार्यशाला का समापन होगा।
राजस्थानी भाषा और कहानी के लिए डॉ. ओला का चयन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने राजस्थानी कहानी को समकालीन जीवन, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। रमा मेहता फाउंडेशन द्वारा उन्हें राजस्थानी कहानी के विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाना राजस्थानी कथा-साहित्य की बढ़ती स्वीकार्यता और नई पीढ़ी के कहानीकारों के लिए वरिष्ठ रचनाकारों के अनुभव की उपयोगिता को भी रेखांकित करता है।
चार भाषाओं के नवोदित कहानीकारों को एक मंच पर लाने वाली यह कार्यशाला भारतीय भाषाओं के बीच रचनात्मक संवाद और कहानी की नई संभावनाओं की तलाश की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।








