



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय के पास स्थित श्रीखुशालदास यूनिवर्सिटी कैंपस में राजस्थान स्थापना दिवस पर 29 मार्च की सुबह जब धूप उतर रही थी, तब बल्ले की गूंज, गेंद की रफ्तार और खिलाड़ियों की उत्साही आवाज़ों ने माहौल को पूरी तरह जीवंत कर दिया। यूं लग रहा था मानो क्रिकेट का यह खेल आपसी मेल-जोल, ऊर्जा और मुस्कान का माध्यम बन गया हो। इसी खेल भावना के साथ श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के खेल विभाग और सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में टीचिंग एवं नॉन-टीचिंग स्टाफ के बीच एक मैत्रीपूर्ण टी-10 क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया, जिसने पूरे परिसर को उत्सव में बदल दिया।
मैच में नॉन-टीचिंग स्टाफ टीम के कप्तान सुनील विरट ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। सीमित ओवरों के इस मुकाबले में टीम ने संभलकर शुरुआत की, लेकिन टीचिंग स्टाफ की सधी हुई गेंदबाजी के सामने खुलकर खेलने में कठिनाई आई। निर्धारित 10 ओवरों में नॉन-टीचिंग स्टाफ की टीम 82 रन ही बना सकी और टीचिंग स्टाफ को 83 रनों का लक्ष्य मिला। यह स्कोर न बहुत बड़ा था, न बहुत छोटाकृयानी मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीचिंग स्टाफ टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। दोनों ओपनर जल्दी पवेलियन लौट गए, जिससे एक समय दबाव की स्थिति बन गई। लेकिन यहीं से कप्तान मदन लाल शर्मा का अनुभव और नेतृत्व काम आया। उन्होंने मैदान पर संयम बनाए रखा और मध्यक्रम के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने की छूट दी। प्रिंस शर्मा और अशद चौधरी ने जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए रन गति को संतुलित रखा और टीम को जीत की ओर ले गए।

मैच का रोमांच नौवें ओवर तक बना रहा, लेकिन टीचिंग स्टाफ टीम ने 5 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबला अपने नाम कर लिया। गेंदबाजी में जसविंद्र सिंह थोड़े महंगे जरूर साबित हुए, लेकिन अंतिम ओवर में उन्होंने उपयोगी बल्लेबाजी करते हुए जीत में अहम योगदान दिया। क्रिकेट का यही सौंदर्य है, यहां हर खिलाड़ी किसी न किसी क्षण नायक बन ही जाता है।

मैच के बाद विजेता टीम के कप्तान मदन लाल शर्मा ने जीत का श्रेय पूरी टीम को दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि टीम भावना, आपसी समझ और बेहतर तालमेल का परिणाम है। उनका यह कथन मैदान पर दिखी एकजुटता को पूरी तरह परिभाषित करता है। मैच में अंपायर की जिम्मेदारी प्रो. डॉ. विक्रम सिंह औलख ने निभाई, जिन्होंने निष्पक्ष निर्णयों से खेल की गरिमा बनाए रखी। इससे पहले उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश जुनेजा एवं रिटायर्ड आईजी गिरीश चावला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साह बढ़ाया।

प्रबंध निदेशक दिनेश जुनेजा ने खिलाड़ियों को खेल भावना के साथ खेलने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए खेल और योग का विशेष महत्व है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के तनावपूर्ण जीवन में मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए खेल और योग सबसे प्रभावी साधन हैं। उन्होंने ऐसी गतिविधियों के नियमित आयोजन पर भी बल दिया। रिटायर्ड आईजी गिरीश चावला ने भी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेलों के सामाजिक और मानसिक लाभों पर प्रकाश डाला।
समापन समारोह में विजेता टीचिंग स्टाफ टीम को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह मुकाबला सिर्फ एक जीत-हार का खेल नहीं था, बल्कि यह संदेश देकर गया कि जब संस्थान में खेल और सौहार्द को स्थान मिलता है, तो कार्य संस्कृति भी मजबूत होती है। सच कहें तो ऐसे आयोजन काम के तनाव पर सीधा बाउंसर मारते हैं, और यही इनकी सबसे बड़ी जीत है।







