



भटनेर पोस्ट डेस्क
हनुमानगढ़ टाउन स्थित अपनाघर वृद्धाश्रम केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट से भरा एक जीवंत परिवार बन गया। मदर्स डे के मौके पर जब सशक्त नारी संस्थान की प्रतिनिधि एकलव्य अनाथ आश्रम के नन्हे बच्चों को लेकर वृद्धाश्रम पहुंचे, तो माहौल में एक अलग ही भावनात्मक ऊर्जा घुल गई। बच्चों की मासूम हंसी और बुजुर्ग माताओं की नम आंखों ने मिलकर ऐसा दृश्य रचा, जहां वर्षों की तन्हाई पलभर में अपनत्व में बदल गई। केक कटे, मिठाइयां बंटी, आशीर्वाद मिला और सबसे बढ़कर मातृत्व का स्नेह और पारिवारिक एहसास दोनों पीढ़ियों के बीच बिना शब्दों के बहने लगा। यह संवेदनाओं को फिर से जगाने की एक सजीव कोशिश थी, सीधी, सच्ची और दिल को छू लेने वाली।
अनाथ आश्रम के बच्चों ने बुजुर्ग माताओं के साथ मिलकर केक काटा और मातृ दिवस की खुशियां साझा कीं। इसके बाद बच्चों और बुजुर्गों के बीच मिठाइयों, केक एवं उपहारों का वितरण किया गया। बच्चों ने बुजुर्ग माताओं के साथ समय बिताया, उनका हालचाल जाना और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं बुजुर्गों के चेहरों पर भी बच्चों के साथ समय बिताकर खुशी और आत्मीयता साफ दिखाई दी।

सशक्त नारी संस्थान की अध्यक्ष मित्ताली अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में समाज में संवेदनाएं और पारिवारिक मूल्य लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों और वर्तमान पीढ़ी को संस्कारवान बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मातृ दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि मां और बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। इसी उद्देश्य को लेकर संस्थान ने छोटे बच्चों के साथ वृद्धाश्रम में यह कार्यक्रम आयोजित किया, ताकि बच्चों में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, प्रेम और सेवा की भावना विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अनेक बुजुर्ग हैं जो अपने परिवार से दूर वृद्धाश्रमों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वहीं कई बच्चे ऐसे हैं जो माता-पिता के स्नेह से वंचित हैं। ऐसे में इन दोनों पीढ़ियों को एक मंच पर लाकर भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

संस्था सचिव प्रीति गुप्ता ने बताया कि इस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार और मानवीय संवेदनाएं देना भी जरूरी है। वृद्धाश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में सेवा, सम्मान और अपनत्व की भावना विकसित करना था। उन्होंने कहा कि जब बच्चे बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं तो उन्हें जीवन के अनुभवों और रिश्तों की अहमियत समझ में आती है। वहीं बुजुर्गों को भी परिवार जैसा माहौल और मानसिक संबल मिलता है।

कार्यक्रम में संस्थान की संरक्षक दीपा डालमिया एवं शिमला गुप्ता, अध्यक्ष मित्ताली अग्रवाल, सचिव प्रीति गुप्ता, कोषाध्यक्ष सीमा गुप्ता, उपाध्यक्ष निशा मित्तल, प्रचार मंत्री रजनी अग्रवाल सहित श्वेता गोयल, श्वेता बब्बर, शिवानी स्वामी, सोनिया राठौड़, सुजाता सुखानी, सुखप्रीत कौर, वीरपाल, मिली पाठक एवं कौशल्या वर्मा व अन्य महिलाओं एवं सदस्यों ने भी भाग लेकर बुजुर्ग माताओं को मातृ दिवस की शुभकामनाएं दीं और समाज में सेवा, संवेदनशीलता एवं पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।




