




भटनेर पोस्ट ब्यूरो
हनुमानगढ़ जिले में निकाय चुनाव की तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। लंबे समय से चुनावी तैयारी और जनसंपर्क में जुटे संभावित प्रत्याशियों की नजर अब आरक्षण लॉटरी पर टिक गई है। हनुमानगढ़ जिले के नगर निकायों के वार्डों और निकाय प्रमुखों के पदों के आरक्षण की लॉटरी अगले 3 से 4 दिन में निकलने की संभावना है। चर्चा है कि 12 से 14 अगस्त के बीच आरक्षण की स्थिति साफ हो सकती है। इसके बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले संभावित प्रत्याशियों की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।
जिले के संभावित प्रत्याशियों के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। कई दावेदार लंबे समय से अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क कर रहे हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। लेकिन वार्ड सामान्य रहेगा या आरक्षित होगा, इसका फैसला लॉटरी के बाद ही होगा। आरक्षण की स्थिति बदलने पर कई दावेदारों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। कुछ दावेदारों को दूसरे वार्डों का रुख करना पड़ सकता है, जबकि आरक्षण अनुकूल रहने पर कई प्रत्याशी तत्काल चुनाव प्रचार को तेज कर सकते हैं।
इस बार हनुमानगढ़ जिले में आठ निकायों में चुनाव होंगे। इनमें हनुमानगढ़, संगरिया, नोहर, भादरा, रावतसर और पीलीबंगा के साथ टिब्बी व गोलूवाला भी शामिल हैं। टिब्बी और गोलूवाला में पहली बार निकाय चुनाव होने के कारण यहां राजनीतिक गतिविधियां विशेष रूप से तेज होने की संभावना है। इन दोनों क्षेत्रों में नए राजनीतिक समीकरण बनने के साथ नए चेहरों के सामने आने की भी उम्मीद है।

चुनाव संबंधी तैयारियों को संबंधित जिला कलक्टर और स्वायत्त शासन विभाग की ओर से अंतिम रूप दिया जा रहा है। पार्षदों के लिए वार्डों के आरक्षण की लॉटरी जिला कलक्टर स्तर पर निकाली जाएगी। वहीं महापौर, सभापति और चेयरमैन पदों के आरक्षण की लॉटरी स्वायत्त शासन विभाग की ओर से निकाली जाएगी। ऐसे में संभावित प्रत्याशियों की सबसे अधिक नजर वार्ड आरक्षण की स्थिति पर है।
वार्ड के सामान्य या आरक्षित होने के आधार पर कई दावेदारों के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। जिन वार्डों में आरक्षण लागू होगा, वहां पहले से तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों को दूसरे वार्डों में विकल्प तलाशना पड़ सकता है। ऐसे दावेदार आसपास के उन वार्डों पर नजर रखेंगे, जहां उनके सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत हैं। दूसरी ओर, आरक्षण अनुकूल रहने वाले दावेदार चुनाव प्रचार में तेजी ला सकते हैं।

लॉटरी के बाद राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आना तय माना जा रहा है। अभी तक वार्डों में संपर्क अभियान चला रहे संभावित प्रत्याशी आरक्षण की स्थिति सामने आने के बाद अपनी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। किस वार्ड से कौन मैदान में रहेगा और किसे नया विकल्प तलाशना पड़ेगा, इसका फैसला काफी हद तक आरक्षण लॉटरी से होगा।
आरक्षण की तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के स्तर पर संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चा चल रही है। आठ निकायों में चुनाव होने के कारण दोनों दलों के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर टिब्बी और गोलूवाला में पहली बार होने वाले चुनावों पर राजनीतिक दलों की विशेष नजर रहेगी।

राजस्थान के सात संभागों में कुल 309 नगरीय निकाय और 10,245 वार्ड प्रस्तावित हैं। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद, 19 द्वितीय श्रेणी नगरपालिकाएं, 58 तृतीय श्रेणी नगरपालिकाएं और 175 चतुर्थ श्रेणी नगरपालिकाएं शामिल हैं। इन सभी निकायों में महापौर, सभापति और चेयरमैन पदों के आरक्षण की स्थिति भी तय की जाएगी।
प्रदेश में जयपुर संभाग में सबसे अधिक 91 निकाय और 2,970 वार्ड हैं। कोटा और उदयपुर संभाग में 28-28 निकाय हैं। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेशभर में निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। फिलहाल हनुमानगढ़ के राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरक्षण लॉटरी किसके पक्ष में जाती है और किस दावेदार को अपनी चुनावी रणनीति बदलनी पड़ती है।






