




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान में प्रस्तावित नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनावों की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। आयोग ने निर्देश जारी किए हैं कि जिन अधिकारियों की तैनाती उनके गृह जिले, गृह नगरीय क्षेत्र अथवा गृह पंचायत समिति क्षेत्र में है या जो लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, उनका 15 अगस्त 2026 तक अनिवार्य रूप से स्थानांतरण किया जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश में शीघ्र ही पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से आयोग ने पूर्व में जारी स्थानांतरण संबंधी निर्देशों में संशोधन करते हुए नई कट-ऑफ तिथि और तबादलों की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है।

आयोग के निर्देशों के अनुसार संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, जिला निर्वाचन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिला कलक्टर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला आबकारी अधिकारी, उपखंड अधिकारी, सहायक कलक्टर, तहसीलदार तथा पुलिस उपाधीक्षक अपने गृह जिले में पदस्थापित नहीं रह सकेंगे। इसी प्रकार जयपुर और जोधपुर शहर में कार्यरत पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त तथा सहायक पुलिस आयुक्तों को भी उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा।

आदेश में नगरीय निकायों के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के आयुक्त, उपायुक्त एवं अधिशासी अधिकारी, नगर सुधार न्यास तथा विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ थानाधिकारी, आबकारी निरीक्षक, नायब तहसीलदार और पुलिस उपनिरीक्षक अपने गृह नगरीय क्षेत्र में कार्यरत नहीं रह सकेंगे।

पंचायतीराज संस्थाओं के स्तर पर भी आयोग ने समान व्यवस्था लागू की है। खंड विकास अधिकारी, थानाधिकारी, आबकारी निरीक्षक, नायब तहसीलदार तथा पुलिस उपनिरीक्षक को उनके गृह पंचायत समिति क्षेत्र से हटाया जाएगा। आयोग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर निष्पक्षता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के हितों के टकराव से बचने के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 नवंबर 2026 को आधार तिथि मानते हुए जिन अधिकारियों ने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी एक जिले, नगरीय क्षेत्र अथवा पंचायत समिति में तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक सेवाएं दी हैं, उनका भी चुनाव से पहले स्थानांतरण किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी इन मानकों के विपरीत पदस्थापित पाया जाता है तो संबंधित विभाग को उसका तबादला 15 अगस्त 2026 तक हर हाल में सुनिश्चित करना होगा।
आयोग ने चुनावी निष्पक्षता को और मजबूत बनाने के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किया है। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध पिछले चुनावों के दौरान चुनाव संबंधी लापरवाही अथवा अनियमितता को लेकर भारत निर्वाचन आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, उन्हें इस बार चुनाव से सीधे जुड़े किसी भी दायित्व पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। आयोग के इस निर्णय को आगामी निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।






