




भटनेर पोस्ट डेस्क
हनुमानगढ़ टाउन स्थित अल्फा सिटी। एक खिली हुई सुबह। सामाजिक सरोकार और संवेदनशील माहौल का गवाह बना कॉलोनी परिसर। अमूमन वीकेंड की सुस्त सुबहों से इतर, आज यहाँ का नज़ारा पूरी तरह बदला हुआ था। कॉलोनी परिसर में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रख्यात चिकित्सकों की भारी मौजूदगी थी। मंच से जब डॉक्टरों ने आधुनिक जीवनशैली के छिपे हुए खतरों से पर्दा उठाना शुरू किया, तो जनता के चेहरे पर चिंता और आत्ममंथन के भाव साफ पढ़े जा सकते थे। पर्यावरण को बचाने के संकल्प की गूंज थी और हर कोई इस बात को गहराई से महसूस कर रहा था कि विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी सेहत और प्रकृति दोनों को कितना पीछे छोड़ आए हैं। मौका था श्डॉक्टर्स फॉर सोसायटी फाउंडेशनश् द्वारा आयोजित पर्यावरण संरक्षण एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला का, जिसने स्थानीय निवासियों को अपनी आदतों को बदलने के लिए झकझोर कर रख दिया।

मुख्य अतिथि और फाउंडेशन के संरक्षक डॉ. पारस जैन एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. गेट ने आज के दौर की सबसे कड़वी सच्चाई को सामने रखा। उन्होंने बेहद सरल शब्दों में समझाया कि आज समाज में जो बीमारियाँ महामारी का रूप ले रही हैं, वे कहीं बाहर से नहीं आईं, बल्कि हमारी अपनी ही देन हैं।
चिकित्सकों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि हमारी बदलती जीवनशैली, शारीरिक श्रम से दूरी और गलत खान-पान की आदतें आज हमें असमय बुढ़ापे और बीमारियों की ओर धकेल रही हैं। फास्ट फूड का चस्का और डिब्बाबंद खाना हमारी सेहत को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है।

कार्यक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और उससे होने वाले दूरगामी नुकसानों पर केंद्रित रहा। डॉक्टरों ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ चेतावनी देते हुए कहा कि जिस प्लास्टिक को हम अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वास्तव में एक धीमा ज़हर है।
वक्ताओं ने बताया कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक जब पर्यावरण में टूटता है, तो वह माइक्रो और नैनो प्लास्टिक (प्लास्टिक के अत्यंत सूक्ष्म कण) में बदल जाता है। ये सूक्ष्म कण हमारे पीने के पानी, भोजन और यहाँ तक कि हवा के ज़रिए मानव शरीर के भीतर प्रवेश कर रहे हैं। डॉक्टरों ने आगाह किया कि यह अदृश्य प्लास्टिक शरीर में पहुंचकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को जन्म दे रहा है। हार्माेनल असंतुलन पैदा कर रहा है, जिससे युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है। डायबिटीज (मधुमेह) और हृदय रोगों का एक बड़ा कारण बन रहा है।

कार्यशाला में मौजूद चिकित्सकों और वक्ताओं ने केवल समस्याएं ही नहीं गिनाईं, बल्कि समाज को एक स्वस्थ और सुरक्षित मार्ग भी दिखाया। उन्होंने जनता से पाँच मुख्य संकल्प लेने का आह्वान किया।
सिंगल यूज़ प्लास्टिक को कहें अलविदा: रोज़मर्रा की ज़िंदगी से प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और डिस्पोजेबल बर्तनों को पूरी तरह बाहर करें।
पारंपरिक विकल्पों को अपनाएं: खरीदारी के लिए हमेशा घर से कपड़े या जूट के थैले लेकर निकलें।
नियमित व्यायाम: शरीर को सक्रिय रखने के लिए रोज़ाना योग, दौड़ या व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
संतुलित और प्राकृतिक भोजन: पैकेटबंद और रिफाइंड फूड की जगह ताज़ी सब्ज़ियों, फलों और मोटे अनाज को प्राथमिकता दें।
प्रकृति से जुड़ाव: अधिक से अधिक पौधरोपण करें और अपने आस-पास के पर्यावरण को स्वच्छ रखने की ज़िम्मेदारी लें। वक्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि जब तक पर्यावरण संरक्षण को एक ‘जनआंदोलन’ नहीं बनाया जाएगा, तब तक आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना असंभव होगा।

इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील आयोजन में हनुमानगढ़ की कई बड़ी हस्तियों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लेकर पर्यावरण की इस मुहिम को अपना समर्थन दिया। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वालों में मुख्य रूप से अध्यक्ष डॉ. विक्रम जैन, सचिव डॉ. नरेश संकलेचा, डॉ. संदीप भाकर, डॉ. पुनीत जैन, डॉ. वरूण आहुजा, डॉ. जतिन सिंगला और डॉ. अर्जुन राठौड़ शामिल रहे। इसके साथ ही, समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हुए अरोड़वंश सभा के अध्यक्ष रामलुभाया तिन्ना, अल्फा सिटी कॉलोनी के अध्यक्ष संजीव गोयल, फूडग्रेन मर्चेन्ट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नरोत्तम सिंगला, साइकलिंग क्लब से पवन सरावगी, एडवोकेट पुष्पेन्द्र सिंह शेखावत, किशन जांगिड़, एडवोकेट जोधा सिंह भाटी एवं बलजिंद्र सिंह सहित भारी संख्या में शहरवासी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने डॉक्टरों की इस अनूठी पहल की सराहना की और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस पूरे भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन को सफल बनाने में मनोज बैद ने अपनी टीम के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी ओर से की गई चाक-चौबंद व्यवस्थाओं की सभी आगंतुकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
सचिव नरेश संकलेचा ने बताया कि डॉक्टर्स फॉर सोसायटी फाउंडेशन केवल कागज़ी दावों या कभी-कभार होने वाले आयोजनों तक सीमित नहीं है। संस्था द्वारा प्रत्येक रविवार समाज के प्रति अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए स्वास्थ्य एवं पर्यावरण जागरूकता के लिए ऐसे अनूठे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। संस्था का यह अनवरत प्रयास हनुमानगढ़ टाउन को एक स्वस्थ और जागरूक समाज बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।





