



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
23 मई 2025 को हनुमानगढ़ के पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार ग्रहण करते ही युवा आईपीएस अधिकारी हरिशंकर ने अधीनस्थ अधिकारियों को साफ संदेश दिया, ड्यूटी में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी। खासतौर पर जिले की सबसे बड़ी और जटिल समस्या, नशे के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की ‘नरमी’ की उम्मीद न रखें। यह संदेश केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाले महीनों में पुलिस की कार्यशैली और परिणामों ने इसे जमीन पर उतार दिया।
पदभार संभालने के तुरंत बाद एसपी हरिशंकर ने पुलिस टीम के साथ नशा सामग्रियों की बिक्री और तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने की शुरुआत की। अब तक छोटी-मोटी कार्रवाई पुलिस प्रक्रिया का हिस्सा रही थी, लेकिन इस बार रणनीति बदली गई। लक्ष्य तय था, खुदरा विक्रेताओं से आगे बढ़कर सीधे सप्लायर्स और नेटवर्क पर प्रहार। इसी सोच के साथ अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया और पुलिसिंग में एक नई आक्रामकता देखने को मिली।

एसपी हरिशंकर की रणनीति का असर कुछ ही समय में दिखने लगा। बीते कुछ महीनों में जिला पुलिस ने करीब 8,861 किलोग्राम से अधिक हेरोइन (चिट्टा) जब्त कर न केवल एक बड़ी तस्करी शृंखला को तोड़ा, बल्कि आमजन के बीच पुलिस के प्रति भरोसा भी मजबूत किया। इसके साथ ही लगभग 3.30 लाख नशीली गोलियां पकड़ी गईं, जो यह दर्शाता है कि कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यवस्थित और व्यापक थी।

मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम कसने के लिए बनाई गई टीमों में एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हर टीम बेहतर परिणाम लाने की कोशिश में जुटी रही। यह प्रतिस्पर्धा दबाव की नहीं, बल्कि नेतृत्व से मिली स्पष्ट दिशा और इच्छाशक्ति का नतीजा थी। इसी अवधि में एनडीपीएस से जुड़े करीब 384 मामले दर्ज किए गए और 650 से अधिक तस्करों व कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया।

कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। नशे के अवैध कारोबार में लिप्त कई सप्लायर्स के मकानों पर बुल्डोजर चलाए गए। इससे एक स्पष्ट संदेश गया कि नशे के धंधे से कमाई गई संपत्ति सुरक्षित नहीं है। इस सख्ती का असर यह हुआ कि नशा कारोबारियों में भय का माहौल बना और कई इलाकों में अवैध गतिविधियां ठप होती नजर आईं। पुलिस की यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहते हुए सख्ती का उदाहरण बनी।

एनडीपीएस के पूर्व विशिष्ट लोक अभियोजक दिनेश दाधीच ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से कहते हैं, ‘एसपी हरिशंकर के नेतृत्व में की गई कार्रवाइयां प्रशंसनीय हैं। जिस आक्रामकता और निरंतरता के साथ पुलिस ने नशा तस्करों पर वार किया, वह जिले के लिए एक मिसाल है।; एडवोकेट दिनेश दाधीच मानते हैं कि यदि एसपी हरिशंकर को कुछ और समय मिलता, तो हनुमानगढ़ में नशे के खिलाफ और बेहतर परिणाम सामने आते।’

सामाजिक संगठनों ने भी इस कार्यकाल को सकारात्मक रूप में देखा। भटनेर किंग्स क्लब के संरक्षक आशीष विजय कहते हैं, ‘पुलिस कप्तान के तौर पर हरिशंकर का कार्यकाल संतोषजनक रहा। आमजन की सुनवाई में तेजी आई और सबसे बड़ी बात यह कि नशा तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई हुई। इससे समाज में यह भरोसा जगा कि पुलिस केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम कर रही है।’

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज बड़सीवाल कहते हैं, ‘अब जिले को नए पुलिस अधीक्षक नरेंद्र मीणा के रूप में अनुभवी नेतृत्व मिला है। समाज और पुलिस महकमे को उम्मीद है कि नशे के खिलाफ शुरू किए गए इस अभियान को और तेज किया जाएगा। आईपीएस हरिशंकर के कार्यकाल में जो सख्त नींव पड़ी, उस पर आगे और मजबूत ढांचा खड़ा करने की अपेक्षा की जा रही है।’

पेशे से अधिवक्ता व बाल कल्याण समिति के पूर्व सदस्य देवकीनंदन चौधरी कहते हैं, ‘एसपी हरिशंकर का हनुमानगढ़ कार्यकाल यह साबित करता है कि यदि नेतृत्व स्पष्ट हो, इच्छाशक्ति मजबूत हो और रणनीति सही हो, तो जटिल से जटिल सामाजिक अपराध पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव है। नशे के खिलाफ यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन इस दौरान पुलिस ने यह भरोसा जरूर दिलाया कि कानून के हाथ लंबे हैं और अब नरमी की गुंजाइश नहीं बची है।’




