



भटनेर पोस्ट डेस्क
बदलती जीवनशैली, खानपान की गड़बड़ियां और शारीरिक निष्क्रियता, इन तीनों ने मिलकर भारत को एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। अब केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर असर डालने वाली समस्या बन चुकी है मधुमेह (डायबिटीज)। इसी चुनौती से वैज्ञानिक समझ, आधुनिक उपचार और जन-जागरूकता के हथियारों से मुकाबला करने के उद्देश्य से रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) राजस्थान चैप्टर का 13वां वार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन ‘आरएसएसडीआई-26’ का आयोजन 28 फरवरी से 1 मार्च तक किया जा रहा है। दो दिवसीय यह सम्मेलन शहर के राजवी पैलेस में होगा।

दरअसल, इस सम्मेलन को मधुमेह के खिलाफ सामूहिक चिंतन और ठोस समाधान तलाशने के मंच के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब देश में मधुमेह के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और यह बीमारी ग्रामीण से लेकर शहरी आबादी तक गहराई से पैठ बना चुकी है।

संरक्षक डॉ. पारस जैन बताते हैं कि आरएसएसडीआई-26 में राजस्थान के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से वरिष्ठ चिकित्सक, डायबिटोलॉजिस्ट, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक सत्र, विशेष व्याख्यान, पैनल चर्चाएं और क्लीनिकल केस स्टडी प्रस्तुत की जाएंगी। इन सत्रों में मधुमेह के नवीनतम शोध, नई दवाओं, इंसुलिन थेरेपी में हो रहे बदलाव, टेक्नोलॉजी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा विज्ञान में तेजी से हो रहे नवाचारों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए ऐसे सम्मेलन अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि सामान्य चिकित्सक से लेकर सुपर-स्पेशलिस्ट तक एक साझा मंच पर अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकें।

सम्मेलन के संरक्षक डॉ. बृजेश गौड़ ने एक चिंताजनक आंकड़े की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारत तेजी से ‘डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ बनता जा रहा है। देश की लगभग 20 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में मधुमेह से प्रभावित है, जबकि चंडीगढ़ जैसे शहरों में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत से भी अधिक बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मधुमेह केवल शुगर बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हृदय रोग, किडनी फेल्योर, आंखों की रोशनी जाने और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसी कई जटिल बीमारियों का कारण बनता है। ऐसे में समय रहते सही जानकारी, सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव ही सबसे प्रभावी हथियार हैं।

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. गेट बताते हैं कि ‘आरएसएसडीआई-26’ की खास बात यह है कि यह सम्मेलन केवल डॉक्टरों और विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहेगा। आमजन में मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। मरीजों और डॉक्टरों के बीच सीधे संवाद के सत्र भी होंगे, जिनमें लोग अपनी शंकाएं विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे। उनका कहना है कि जब तक मरीज खुद अपनी बीमारी को नहीं समझेगा, तब तक कोई भी उपचार पूरी तरह सफल नहीं हो सकता।

सम्मेलन में दवाओं और तकनीकी उपचार के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव को भी खास महत्व दिया जाएगा। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और समय-समय पर जांचकृइन चार बिंदुओं को मधुमेह नियंत्रण की आधारशिला के रूप में रेखांकित किया जाएगा। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देंगे कि शुरुआती स्तर पर सही आदतें अपनाकर मधुमेह को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

इस अवसर पर आरएसएसडीआई राजस्थान 2026 की कार्यकारिणी समिति के संरक्षक डॉ. पारस जैन, संरक्षक डॉ. बृजेश गौड़, अध्यक्ष डॉ. एस.एस. गेट, सचिव डॉ. ऐश्वर्या गुप्ता, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह शेखावत सहित डॉ. दीपक चौधरी, डॉ. ज्ञान सिंह शेखावत, डॉ. राजीव मुंजाल, डॉ. अमृत पाल सिंह और डॉ. राकेश फगेड़िया समेत अनेक चिकित्सक मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पंजीकरण प्रक्रिया लगातार जारी है। कुल मिलाकर, आरएसएसडीआई-26 केवल एक वार्षिक सम्मेलन नहीं, बल्कि मधुमेह के खिलाफ जागरूकता, विज्ञान और मानवीय संवेदना का साझा प्रयास है, जहां इलाज के साथ-साथ समझ और संवाद को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है।






