






भटनेर पोस्ट डॉट कॉम
हनुमानगढ़ नगर परिषद के चुनावी नतीजों ने स्थानीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह उलट-पलट कर रख दिया है। नगर परिषद के सभी 60 वार्डों के घोषित परिणामों में मतदाताओं ने मुख्यधारा के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों बीजेपी और आईएनसी के बजाय निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल गुट के प्रत्याशियों पर सबसे अधिक भरोसा जताया है। कुल 60 वार्डों में से आधे से अधिक यानी 32 सीटों पर बंसल गुट के प्रत्याशियों ने परचम लहराया है। वहीं बीजेपी 15 सीटों के साथ दूसरे और कांग्रेस मात्र 10 सीटों पर सिमटकर तीसरे स्थान पर रही है, जबकि एक सीट माकपा (सीपीएम) की झोली में गई है।
इस परिणाम से स्पष्ट है कि शहर की जनता ने गणेशराज बंसल को शहर की सरकार बनाने का आदेश दिया है। नगर परिषद का नया बोर्ड निर्दलीय बनाएंगे और वह भी पूर्ण बहुमत के साथ।
गणेशराज गुट का वर्चस्व और बीजेपी की घेराबंदी
पूरे चुनाव में सबसे चर्चित पहलू विधायक गणेशराज बंसल का प्रभाव रहा। हनुमानगढ़ जंक्शन क्षेत्र में पूरी तरह ‘गणेशराज की लहर’ नजर आई, जहां उनके समर्थक निर्दलीय प्रत्याशियों ने भारी बढ़त बनाई। परिणामों के साथ ही विधायक आवास पर जश्न का माहौल रहा और समर्थकों ने ‘मेरी आवाज गणेशराज’ के नारों से आसमान गुंजायमान कर दिया।
इसके उलट, टाउन क्षेत्र में बीजेपी का परंपरागत कैडर जंक्शन के मुकाबले मजबूत साबित हुआ। बीजेपी ने शहर के कई महत्वपूर्ण वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी स्थिति सुदृढ़ की। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद वार्ड 15 से विजयी प्रत्याशी नगीना बाई सीधे पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप के आवास पहुंचीं, उनका आशीर्वाद लिया और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों व माल्यार्पण के साथ उनका स्वागत किया।
‘हॉट सीट’ पर विधायक पत्नी की हार
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम वार्ड 17 से सामने आया, जिसे पूरे जिले की सबसे ‘हॉट सीट’ माना जा रहा था। विधायक गणेशराज बंसल की धर्मपत्नी संतोष बंसल इस वार्ड से चुनाव मैदान में थीं। जंक्शन में विधायक के जबरदस्त दबदबे के बावजूद वार्ड 17 का मुकाबला बेहद कड़ा साबित हुआ। यहां बीजेपी के हिमांशु ने 906 मत प्राप्त कर संतोष बंसल को हरा दिया और सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया। विधायक परिवार की इस सीधी हार ने विरोधियों को हमलावर होने का मौका दिया है, वहीं विधायक समर्थक खेमे के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ।
सियासत में चला जोड़ियों का जादू
इस चुनाव की सबसे अनोखी और सुखद तस्वीर तीन दंपतियों (पति-पत्नी) की एक साथ जीत रही। नई खुंजा इलाके में मनोज बड़सीवाल ने खुद वार्ड 2 से (1044 वोट) और उनकी धर्मपत्नी निशा ने वार्ड 3 से (675 वोट) जीतकर इतिहास रच दिया। अब यह दंपत्ति ‘आधी नई खुंजा का सरताज’ कहला रहा है।
पिछले बोर्ड में सुमित रणवां व मंजू रिणवा पार्षद थे। बाद में सुमित चेयरमैन बने। इस लोकप्रिय जोड़ी ने अपनी पकड़ फिर साबित की। वार्ड 7 से सुमित कुमार (811 वोट) और वार्ड 13 से मंजू रणवां (1019 वोट) भारी मतों से विजयी हुईं।
अनिल व सुशीला खीचड़ (कांग्रेस) की जोड़ी भी चर्चा में है। कांग्रेस खेमे से अनिल कुमार खीचड़ ने वार्ड 28 से (773 वोट) और उनकी धर्मपत्नी सुशीला खीचड़ ने वार्ड 32 से (639 वोट) विजय हासिल कर परिषद में तीसरी जोड़ी के रूप में प्रवेश किया। पिछले बोर्ड में भी यह जोड़ी पार्षद थी। इसके अलावा, वार्ड 42 से बीजेपी की विनीता बतरा (डॉ. निशांत बतरा की धर्मपत्नी) ने 988 मत हासिल कर प्रभावशाली जीत दर्ज की।
लॉटरी और 3 वोटों का फासला
चुनावी रोमांच का स्तर यह रहा कि दो वार्डों का फैसला ‘लॉटरी’ (पर्ची) के जरिए हुआ। वार्ड 5 में निर्दलीय मुकदर अली (750 वोट) और वार्ड 37 में निर्दलीय मंगतराम (567 वोट) को बराबर मत मिलने के बाद भाग्य के सहारे लॉटरी से विजयी घोषित किया गया। वहीं वार्ड 57 में निर्दलीय अंजू देवी ने महज 3 वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
अगर मतों के लिहाज से सबसे बड़ी जीत की बात करें तो वार्ड 60 से निर्दलीय रूपेंद्र यादव ने सर्वाधिक 1827 वोट, वार्ड 47 से कांग्रेस के श्रवण कुमार ने 1404 वोट, और वार्ड 8 से निर्दलीय सर्वजीत कौर ने 1384 वोट हासिल कर अपना जनाधार साबित किया। सबसे कम मतों से जीत वार्ड 54 में लाजवंती (275 वोट) की रही।
गोलूवाला और पीलीबंगा का परिदृश्य
हनुमानगढ़ नगर परिषद के अलावा आसपास के निकायों में भी रोचक परिणाम देखने को मिले। पीलीबंगा के 35 वार्डों में मतदाताओं ने स्थिर सरकार के पक्ष में मतदान किया। यहां बीजेपी ने 18 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 15 सीटें मिलीं, जबकि 2 निर्दलीय चुनाव जीतने में सफल रहे। यहां बीजेपी का बोर्ड बनना तय है।
वहीं, 25 वार्डों वाली गोलूवाला नगर पालिका में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बीजेपी 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि कांग्रेस 10 सीटों के साथ ठीक पीछे खड़ी है। यहां 4 निर्दलीय पार्षदों ने जीत हासिल की है। अब यह 4 निर्दलीय ही तय करेंगे कि गोलूवाला में अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेगा।







