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हनुमानगढ़ नगरपरिषद चुनाव के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस के तीन व विधायक गणेशराज बंसल गुट के एक प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया। नामांकन रद्द किए जाने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भू-अभिलेखाकार सभागार में जमकर हंगामा किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दो प्रत्याशियों के नामांकन दबाव में आकर जबरन रद्द किए गए हैं। नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए। मौके पर कांग्रेस सेवा दल के जिलाध्यक्ष अश्विनी पारीक, ब्लॉक अध्यक्ष बेबी जैन सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोहित जावा और गुरमीत चंदड़ा भी धरने में शामिल हुए।
नामांकन जांच के दौरान वार्ड 31 से कांग्रेस प्रत्याशी लखवीर सिंह, वार्ड 37 से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित जावा, वार्ड 52 से कांग्रेस प्रत्याशी बंशीलाल तथा वार्ड 58 से विधायक गणेशराज बंसल गुट के प्रत्याशी रमजान का नामांकन खारिज किया गया।
चार प्रत्याशियों के पर्चे निरस्त होने की सूचना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नामांकन खारिज करने से पहले प्रत्याशियों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए था।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन पर दबाव बनाया गया और इसी दबाव के चलते दो प्रत्याशियों के नामांकन जबरन रद्द किए गए। कांग्रेस नेताओं ने एसडीएम पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि चुनावी प्रक्रिया में प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि नामांकन पत्रों में कोई कमी थी तो प्रत्याशियों को इसकी जानकारी देकर नियमानुसार सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि प्रत्याशियों को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना नामांकन निरस्त कर दिए गए?

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम के समक्ष अपनी नाराजगी जताई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई। मामला बढ़ने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता कार्यालय में ही धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नामांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दो साल से निकाय चुनाव नहीं करवाए गए और अब जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई है तो नामांकन स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एडीएम उम्मेदीलाल मीणा ने किसी भी तरह के भेदभाव से इनकार किया। उन्होंने कहाकि कागजात के आधार पर निर्णय किया गया है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लंबे समय से निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के सामने अब नामांकन खारिज होने का विवाद खड़ा हो गया है। नेताओं ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसमें सभी प्रत्याशियों को समान अवसर मिलना चाहिए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से नामांकन निरस्त किए जाने के कारणों को स्पष्ट करने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि किसी प्रत्याशी के नामांकन में तकनीकी या कानूनी कमी थी तो नियमानुसार उसका परीक्षण किया जाना चाहिए था, लेकिन किसी भी प्रत्याशी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
नामांकन रद्द किए जाने का विवाद अब महज चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव का रूप लेता नजर आया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धरना और नेताओं के आरोपों के बाद मौके पर राजनीतिक पारा चढ़ गया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह नामांकन निरस्त किए जाने के मामले को लेकर आगे भी आवाज उठाएगी। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर नामांकन पत्रों की जांच और उन्हें खारिज किए जाने के पीछे बताए गए नियमों एवं कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बीच नामांकन निरस्तीकरण का यह मामला अब हनुमानगढ़ की चुनावी राजनीति में नया मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मामले को किस स्तर तक ले जाती है और प्रशासन की ओर से इस पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।




