गोपाल झा.अजीब दौर है यह। अधिकांश लोग रात को अपने दिल-दिमाग में शिकायतों का पिटारा लेकर सोते...
ज से जिंदगी
गोपाल झा.कभी-कभी लगता है कि मेरे जीवन की नींव में, मेरे हर निर्णय के पीछे, हर कठिन...
गोपाल झा.सत्य, अहिंसा और आत्मनियंत्रण। ये तीन शब्द भर नहीं हैं। मनुष्य को मनुष्य लायक बनाने के...
गोपाल झा.मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या हैये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी...
गोपाल झा.जीवन एक यात्रा है। इसमें भांति-भांति के लोग मिलते हैं। मसलन, एक सज्जन हैं। दिखने में...