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दोपहर की गुनगुनी धूप विद्यालय के आंगन में फैल रही थी। घंटी की टन-टन के साथ बच्चों की खिलखिलाहट गूंज उठी और देखते ही देखते कतारें लग गईं। हाथ में थाली थामे नन्हे-मुन्ने बच्चे मध्याह्न भोजन के इंतजार में फर्श पर पालथी मारकर बैठे ही थे कि उनके बीच एक ऐसा शख्स आकर बैठ गया, जिसे अमूमन लोग सिर्फ लाल बत्ती और बंद कमरों की बैठकों से जोड़कर देखते हैं। बिना किसी हिचक, बिना किसी तामझाम और प्रशासनिक औपचारिकता को परे रखते हुए हनुमानगढ़ के जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव फर्श पर बच्चों की कतार में शामिल हो गए। सामने सजी सादी थाली, पास बैठे मासूम चेहरे और चेहरे पर वही सहज, सौम्य मुस्कान, यह दृश्य केवल एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि सादगी और अपनत्व की जीती-जागती तस्वीर बन गया।
अवसर था हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित सतीपुरा स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के औचक निरीक्षण का। 29 सितंबर की इस दोपहर कलक्टर पीएम पोषण (मिड डे मील) योजना की जमीनी हकीकत परखने पहुंचे थे। जब वे पहुंचे, तो न कोई विशेष मेज सजी और न ही वीआईपी कुर्सी की मांग हुई। कलक्टर सीधे बच्चों के बीच गए, फर्श पर उनके साथ पंक्ति में बैठे और भोजन ग्रहण किया। बच्चों से पूछते जा रहे थे, ‘रोटी नरम है?’ ‘दाल का स्वाद कैसा लगा?’ और ‘पढ़ाई कैसी चल रही है?’ बच्चों की झिझक कुछ ही पलों में हवा हो गई और वे जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी से ऐसे बतियाने लगे मानो कोई अपना बड़ा भाई या शिक्षक उनके साथ भोजन का आनंद ले रहा हो।
फर्श पर बैठकर बच्चों के साथ खाना खाने का मकसद सिर्फ औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि व्यवस्था की धड़कन को छूना था। डॉ. खुशाल यादव ने स्वयं भोजन कर उसकी पौष्टिकता और स्वाद को परखा। इसके साथ ही उन्होंने पूरी वितरण प्रणाली को बारीकी से देखा, थाली कैसे परोसी जा रही है, स्वच्छता का स्तर क्या है और क्या तय मापदंडों के अनुसार बच्चों को भरपूर पोषण मिल पा रहा है।
भोजन के बाद उन्होंने पूरे विद्यालय परिसर का जायजा लिया। कक्षाओं की स्थिति, पीने के पानी की व्यवस्था और शौचालयों की स्वच्छता को खुद जाकर देखा। निरीक्षण के दौरान मौजूद विद्यालय प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को दो-टूक मगर शांत लहजे में हिदायत दी कि पीएम पोषण योजना में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। निर्धारित मानकों के अनुसार हर रोज बच्चों को पौष्टिक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना अनिवार्य है।
आईएएस डॉ. खुशाल यादव का यह अंदाज जिले के लोगों के लिए नया नहीं है। वे प्रशासनिक गलियारों में अपने शांत, संयत और सहज व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी कार्यशैली का सबसे मजबूत पहलू है, अधिकारियों पर भरोसा जताना और सत्ता का विकेंद्रीकरण। वे शक्तियों को समेटने के बजाय टीम के हर सदस्य को जिम्मेदारी सौंपकर काम लेने में विश्वास रखते हैं। जब शीर्ष पर बैठा अधिकारी सहज सुलभ हो, तो नीचे तक उसका असर दिखता है।
जिले के युवाओं के बीच उनका ‘कलक्टर क्लास’ का नवाचार पहले ही खासी सराहना बटोर रहा है। इस पहल के जरिए युवाओं को प्रशासनिक तथा करियर संबंधी मार्गदर्शन दिया जाता है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही हैं।
कृषि प्रधान हनुमानगढ़ जिले में उनकी प्राथमिकताओं का दायरा भी बिल्कुल स्पष्ट है, खेत-खलिहान से जुड़े किसान, रोजगार और मार्गदर्शन की तलाश में भटकते युवा, और इंसाफ की उम्मीद लिए दफ्तरों के चक्कर काटते पीड़ित। इन तीनों वर्गों की तत्काल सुनवाई और समाधान ही उनका मुख्य फोकस है। सतीपुरा विद्यालय के फर्श पर बैठकर खाया गया वह भोजन केवल एक निरीक्षण नहीं, बल्कि इस बात का संदेश था कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो जनसेवा कागजों से उतरकर सीधे आम आदमी के दिल में जगह बना लेती है।







