








भटनेर पोस्ट डॉट कॉम
नवगठित गोलूवाला नगरपालिका के पहले ही ऐतिहासिक चुनाव में वार्ड नंबर 8 से चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस द्वारा ऐन वक्त पर टिकट काटे जाने से नाराज होकर निर्दलीय मैदान में उतरीं इंद्रा देवी (पत्नी ओमप्रकाश माली) ने पार्टी प्रत्याशी को कड़े मुकाबले में 12 मतों से पराजित कर शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के तुरंत बाद इंद्रा देवी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान कर स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
इंद्रा देवी का परिवार लंबे समय से निष्ठापूर्वक कांग्रेस संगठन से जुड़ा रहा है। नवगठित नगरपालिका के पहले चुनाव को लेकर इंद्रा देवी और उनका परिवार पिछले कई महीनों से वार्ड स्तर पर सक्रिय रहकर जमीन तैयार कर रहा था। उन्हें और उनके समर्थकों को पूरी उम्मीद थी कि पार्टी उनकी वफादारी और जमीनी मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें ही अधिकृत उम्मीदवार बनाएगी। हालांकि, पार्टी के स्थानीय नेतृत्व और चुनाव रणनीतिकारों ने ऐन मौके पर समीकरण बदलते हुए इंद्रा देवी का टिकट काट दिया और गीता देवी को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस अप्रत्याशित निर्णय से न केवल इंद्रा देवी का परिवार बल्कि वार्ड के स्थानीय मतदाता और समर्थक भी स्तब्ध रह गए।
टिकट कटने के बाद जब बैठ जाने और चुनाव से हटने का राजनीतिक दबाव बनने लगा, तब स्थानीय नागरिकों और समर्थकों ने खुलकर इंद्रा देवी का साथ दिया। वार्डवासियों ने उनसे किसी भी सूरत में पीछे न हटने और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोकने का पुरजोर आग्रह किया। जनता के भारी समर्थन और विश्वास को देखते हुए इंद्रा देवी ने निर्दलीय पर्चा दाखिल कर दिया। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने वार्ड में व्यक्तिगत संपर्क और जनसेवा को अपना मुख्य आधार बनाया।
मतगणना के दिन वार्ड नंबर 8 की सीट पर बेहद करीबी और सांसें थाम देने वाला मुकाबला देखने को मिला। परिणाम घोषित होने पर निर्दलीय प्रत्याशी इंद्रा देवी को कुल 158 मत मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी गीता देवी 146 मतों पर ही सिमट गईं। महज 12 वोटों के इस अंतर ने साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर जनता पार्टी के सिंबल से ज्यादा उम्मीदवार के व्यक्तिगत प्रभाव और संबंधों को तरजीह देती है।
बीजेपी को समर्थन का बड़ा फैसला
जीत हासिल करने के बाद इंद्रा देवी ने कांग्रेस की गलत टिकट वितरण नीति के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत निर्णय का शिकार होने के बाद अब उनका कांग्रेस में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। लिहाजा, उन्होंने नगरपालिका बोर्ड गठन के लिए बीजेपी को खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी। गोलूवाला नगरपालिका के पहले चुनाव में यह परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ा सबक बनकर उभरा है, जहां गलत टिकट वितरण ने न केवल पार्टी को सीट गंवाने पर मजबूर किया, बल्कि बोर्ड गठन के गणित में भी विरोधी दल को मजबूती दे दी।








