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हनुमानगढ़ में निकाय चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही भाजपा के भीतर मची रार सड़क पर आ गई। ईवीएम सील हुए आधा घंटा भी नहीं बीता था कि जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने ऐसा फरमान जारी कर दिया, जिसने लोकल पॉलिटिक्स में खलबली मचा दी। पार्टी ने जंक्शन मंडल अध्यक्ष प्रकाश तंवर को तुरंत प्रभाव से पद से हटा दिया और उनकी जगह जिला प्रवक्ता आशीष पारीक को कमान सौंप दी।
रिजल्ट आने से पहले ही संगठन में हुआ यह तगड़ा फेरबदल साफ इशारा कर रहा है कि चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं था। पर्दे के पीछे जो खींचतान पक रही थी, वह वोटिंग खत्म होते ही अचानक फट पड़ी।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस पूरी कार्रवाई का सीधा कनेक्शन वार्ड नंबर 17 से जुड़ा है। यह वार्ड पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा हॉट सीट बना रहा। दरअसल, हटाए गए मंडल अध्यक्ष प्रकाश तंवर इसी वार्ड के रहने वाले हैं। यहां चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा और हाई-प्रोफाइल था।
एक तरफ स्थानीय विधायक गणेशराज बंसल की पत्नी संतोष बंसल निर्दलीय प्रत्याशी हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा ने हिमांशु महर्षि को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। चर्चा है कि संगठन को इस वार्ड में ‘भीतरघात’ और ‘क्राउड मैनेजमेंट’ में गड़बड़ी का अंदेशा था। वोटिंग खत्म होते ही जिस तरह आधे घंटे में एक्शन हुआ, उससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी हाईकमान या जिला नेतृत्व को तंवर की भूमिका पर शक था।

इस बड़े एक्शन के बाद दोनों ही खेमों ने चुप्पी साध रखी है। न तो जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने तंवर को हटाने की कोई औपचारिक वजह बताई है और न ही प्रकाश तंवर खुलकर कुछ बोल रहे हैं। लेकिन यह खामोशी बता रही है कि भाजपा के भीतर गुटबाजी किस हद तक हावी हो चुकी है।
पार्टी कार्यकर्ताओं में कानाफूसी तेज है कि अगर सब कुछ सामान्य था, तो नतीजों का इंतजार किए बिना इतनी हड़बड़ी में फैसला क्यों लिया गया? आशीष पारीक को कुर्सी सौंपकर संगठन ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश तो की है, लेकिन मतदान के तुरंत बाद हुई इस सर्जरी ने यह तय कर दिया है कि चुनाव परिणाम चाहे जो आएं, भाजपा के भीतर अनुशासन और गुटबाजी को लेकर रस्साकशी अभी और तेज होगी।






