




भटनेर पोस्ट डेस्क
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित गंगानगर सहकारी स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड की भूमि, भवन और मशीनरी के हस्तांतरण पर न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश राजीव जांगिड़ ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि मूल वाद का अंतिम निर्णय होने तक स्पिनिंग मिल की भूमि, भवन एवं मशीनरी का किसी भी प्रकार से हस्तांतरण नहीं किया जाए। न्यायालय का यह अंतरिम आदेश सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जारी किया गया।
यह मामला अधिवक्ता शंकर सोनी की ओर से दायर जनहित वाद से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता शंकर सोनी ने 17 जनवरी 2018 को सिविल न्यायाधीश, हनुमानगढ़ के समक्ष जनहित वाद प्रस्तुत किया था। बाद में यह वाद वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश, हनुमानगढ़ के न्यायालय में अंतरित हो गया, जहां इसकी सुनवाई जारी है।

वाद में कहा गया है कि गंगानगर सहकारी स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड, हनुमानगढ़ एक सहकारी संस्था है, जिसमें 6480 व्यक्तिगत सदस्य तथा 409 सहकारी समितियां सदस्य के रूप में जुड़ी हुई हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह संस्था सहकारी ढांचे के तहत संचालित होती है और इसकी संपत्तियों पर निर्णय लेने का अधिकार सहकारी संस्था के प्रावधानों के अनुरूप ही होना चाहिए।

दावे में यह भी कहा गया है कि राजस्थान सरकार को सहकारी समिति की इस इकाई की संपत्ति को बेचने अथवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसा कोई भी निर्णय सहकारी संस्था के सदस्यों के अधिकारों और सहकारिता के मूल सिद्धांतों के विपरीत होगा।

वाद में राज्य सरकार के विरुद्ध गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि सरकार कथित रूप से असद्भावपूर्वक इस सहकारी इकाई को वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर बेचने अथवा बड़े उद्योगपतियों के साथ मिलकर उसे पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की योजना बना रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इससे सहकारी संस्था की संपत्तियों पर निजी हितों का कब्जा हो सकता है तथा हजारों सदस्यों के हित प्रभावित होंगे।
हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार का पक्ष न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अभी शेष है। न्यायालय ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना केवल अंतरिम राहत प्रदान की है, ताकि मूल वाद के निर्णय तक संबंधित संपत्तियों की वर्तमान स्थिति यथावत बनी रहे।

वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश राजीव जांगिड़ ने सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि मूल वाद का अंतिम निर्णय होने तक स्पिनिंग मिल की भूमि, भवन और मशीनरी का किसी भी प्रकार से हस्तांतरण नहीं किया जाएगा। इस आदेश का उद्देश्य विवादित संपत्ति की यथास्थिति बनाए रखना है, जिससे अंतिम निर्णय प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
मामले की अगली सुनवाई के लिए न्यायालय ने 1 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है। उस दिन वाद की आगे की सुनवाई होगी और संबंधित पक्ष अपने-अपने तर्क एवं साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। स्पिनिंग मिल से जुड़े हजारों सदस्यों और सहकारी समितियों की नजर अब इस मामले की आगामी सुनवाई और न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।





