






भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित राजवी पैलेस में रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) राजस्थान के राज्य स्तरीय दो दिवसीय चिकित्सा सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देशभर से लगभग 550 वरिष्ठ चिकित्सक, डायबिटोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने तेजी से बढ़ते मधुमेह, उसके कारणों और प्रभावी नियंत्रण पर गंभीर चिंता जताते हुए नवीन शोध, आधुनिक दवाओं और जीवनशैली सुधार को समय की आवश्यकता बताया। यह सम्मेलन न केवल चिकित्सकीय ज्ञान का आदान-प्रदान है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक ठोस कदम भी है।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. वी. डी. माहेश्वरी थे, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अरविंद माथुर उपस्थित रहे। अध्यक्षता आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. एस. एस. गेट ने की। राजस्थान आरएसएसडीआई के चेयरमैन डॉ. डी. सी. शर्मा, चेयरमैन निर्वाचित डॉ. प्रद्युम्न शर्मा, मुख्य संरक्षक डॉ. के. के. पारीक, आईसीपी डीन डॉ. गिरीश माथुर, राजस्थान आरएसएसडीआई के मानद सचिव डॉ. पुनीत सक्सेना, आयोजन सचिव डॉ. ऐश्वर्य गुप्ता, वैज्ञानिक अध्यक्ष डॉ. ओ. पी. बेनीवाल, डॉ. अमृतपाल सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पारस जैन तथा डॉ. बृजेश गौड़, डॉ. राकेश फागेड़िया, डॉ. दीपक चौधरी, डॉ. प्रताप सिंह, डॉ. ज्ञान सिंह, शेखावत सहित अनेक विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी।

वक्ताओं ने कहा कि भारत तेजी से मधुमेह प्रभावित देशों में अग्रणी बनता जा रहा है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में चिकित्सकों के लिए नवीनतम शोध, नई दवाओं और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी साझा करना अत्यंत आवश्यक है।

आयोजन समिति सदस्य डॉ. अमृतपाल सिंह ने बताया कि सम्मेलन के प्रथम दिन विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें विशेषज्ञों ने डायबिटीज प्रबंधन, नई इंसुलिन थेरेपी, अत्याधुनिक दवाओं और रोग नियंत्रण की रणनीतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। पैनल चर्चा और केस स्टडी के माध्यम से जटिल मामलों पर भी मंथन किया गया। सभी विशेषज्ञों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए मधुमेह नियंत्रण के व्यावहारिक उपायों पर जोर दिया।

आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. एस. एस. गेट ने जानकारी दी कि सम्मेलन केवल चिकित्सकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आमजन को भी इससे जोड़ा जाएगा। दूसरे दिन के सत्रों में देशभर से आए विशेषज्ञ डायबिटीज टाइप-2 की रोकथाम, नई इंसुलिन तकनीकों, दवाओं के प्रभावी उपयोग और समय रहते जटिलताओं की पहचान पर विस्तृत चर्चा करेंगे। विशेष रूप से मधुमेह के कारण हृदय और किडनी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समय पर पहचानकर उन्हें नियंत्रित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जांच, संतुलित जीवनशैली और नियमित उपचार से मधुमेह के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राजस्थान आरएसएसडीआई के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में भी सहायक सिद्ध होते हैं। सम्मेलन के माध्यम से नवीन शोध और चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी राज्य के विभिन्न जिलों तक पहुंचेगी।

आयोजन सचिव डॉ. ऐश्वर्य गुप्ता ने आभार व्यक्त किया तथा सम्मेलन की सफलता के लिए सभी के सहयोग की सराहना की। आयोजकों के अनुसार पंजीकरण प्रक्रिया जारी है और दूसरे दिन भी महत्वपूर्ण सत्रों का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन को लेकर चिकित्सकों और प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।




