



भटनेर पोस्ट डेस्क
हनुमानगढ़ टाउन स्थित महिति लॉ अकादमी में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर विचारोत्तेजक भाषण प्रतियोगिता हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को अपने विचार निर्भीकता से रखने, सामाजिक-कानूनी व्यवस्थाओं पर प्रश्न उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने का मंच देना रहा। कार्यक्रम का संचालन महिति लॉ अकादमी की संस्थापक डॉ. सुचेता जैन ने किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर का जीवन युवाओं के लिए केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी मार्गदर्शक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे सवाल पूछने की आदत विकसित करें, क्योंकि सवाल ही समाज को आगे बढ़ाते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं निर्णायक के रूप में शिक्षाविद् डॉ. संतोष राजपुरोहित तथा डॉ. अर्चना गोदारा उपस्थित रहीं। डॉ. राजपुरोहित ने कहा कि जीवन की हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। बाबा साहेब अंबेडकर ने कठिन से कठिन हालात में भी हिम्मत नहीं हारी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उनका संदेश था, परिस्थितियां जैसी भी हों, दृष्टि स्पष्ट हो तो रास्ता खुद बन जाता है।

वहीं डॉ. अर्चना गोदारा ने कानून और नैतिकता के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि कानून का पालन केवल भय के कारण किया जाएगा, तो वह समाज में स्थायी सुधार नहीं ला सकता। उन्होंने कहा कि कानून तभी प्रभावी बनता है जब नागरिक उसे अपने कर्तव्य और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें। यह बात विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रही, क्योंकि वही भविष्य के विधि विशेषज्ञ हैं।

भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने सामाजिक न्याय, समानता, संविधान की भावना और वर्तमान व्यवस्था की चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं की तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास और विषय की समझ ने निर्णायकों को प्रभावित किया।
प्रतियोगिता में सौरव बजाज ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि आर्ची उपविजेता रहीं। दोनों ही प्रतिभागियों ने अपने सशक्त तर्कों और स्पष्ट अभिव्यक्ति से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम के अंत में सुशील जैन ने सभी अतिथियों, निर्णायकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी विद्यार्थियों को बाबा साहेब अंबेडकर के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी गई।





