







सतीश गर्ग
संगरिया नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चल रही सरगर्मियों के बीच नवनिर्वाचित पार्षदों से जुड़ा एक विवादित घटनाक्रम सामने आने के बाद क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है। वार्ड नंबर 6 के नवनिर्वाचित पार्षद ओमप्रकाश स्वामी और वार्ड नंबर 23 के नवनिर्वाचित पार्षद साहिल स्वामी के परिजनों द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत और उसके बाद पंजाब के पटियाला स्थित एक होटल में पुलिस की कथित दबिश को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए हैं। इस पूरे प्रकरण ने थाने के बाहर भारी हंगामे और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच शहर में गहरा तनाव पैदा कर दिया है।
घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब नवनिर्वाचित पार्षद ओमप्रकाश स्वामी तथा साहिल स्वामी के परिजनों ने संगरिया पुलिस थाने में एक प्रार्थना पत्र सौंपा। इस प्रार्थना पत्र में परिजनों ने आशंका व्यक्त की थी कि उनके पारिवारिक सदस्यों को कुछ अज्ञात लोग अपने साथ ले गए हैं।
शिकायत मिलने के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और परिजनों द्वारा बताए गए ठिकाने पटियाला स्थित एक निजी होटल (होटल हवेली) पर पहुंची। पुलिस के अनुसार, टीम जब मौके पर पहुंची और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की, तो संबंधित पार्षदों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से वहां ठहरे हुए हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की कोई जबरदस्ती या अपहरण नहीं हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे प्राप्त शिकायत और कानूनी प्रक्रिया के तहत केवल स्थिति का सत्यापन करने गए थे।
दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर संगरिया पुलिस और संबंधित व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सामने आए विवरण के अनुसार, हरियाणा नंबर की एक गाड़ी सहित संगरिया थाने के पुलिस अधिकारी हरबंस राय, रणवीर सिंह और करीब 20 अन्य लोग देर रात लगभग 2 बजे पटियाला के होटल पहुंचे।
आरोप है कि पुलिस ने रात करीब 10 बजे एफआईआर दर्ज करने के महज कुछ ही घंटों के भीतर आधी रात को होटल में दबिश दी और वहां ठहरे नवनिर्वाचित पार्षदों को कथित तौर पर जबरन अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। यह भी आरोप लगाया गया है कि इस दौरान वहां मौजूद महिलाओं व पार्षदों के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी की गई। पार्षदों द्वारा यह स्पष्ट कहने के बावजूद कि वे किसी दबाव, भय या प्रलोभन के बिना स्वेच्छा से वहां रुके हैं, उन्हें जबरन उठाने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम के बाद आधी रात को पुलिस की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी और कार्यप्रणाली के पीछे राजनीतिक दबाव की आशंका जताते हुए सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
घटना की सूचना जैसे ही संगरिया और आसपास के इलाकों में फैली, माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों पक्षों के समर्थक, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देर रात बड़ी संख्या में संगरिया पुलिस थाने के बाहर एकत्र होने लगे। देखते ही देखते थाने के मुख्य द्वार पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ समय के लिए थाने के घेराव जैसी स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए थाने के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा जाब्ता तैनात किया गया और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।
विधायक अभिमन्यु पूनिया के आरोप, लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश
घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक अभिमन्यु पूनिया ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि देर रात भाजपा सरकार के कथित इशारे पर संगरिया पुलिस द्वारा जो कार्रवाई की गई, वह लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास और बेहद निंदनीय है।
पूनिया ने आरोप लगाया कि जनता द्वारा चुने गए पार्षदों और उनके परिजनों पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है तथा उनका अपहरण करने की कोशिशें की गईं। उन्होंने कहा कि जनता के स्पष्ट जनादेश को डर, लालच या पुलिसिया दबाव के दम पर नहीं बदला जा सकता। चुने हुए जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। पूनिया ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते अपना पक्षपाती रवैया नहीं बदला, तो एक बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू बोले-बदनाम करने की साजिश
दूसरी तरफ, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने कांग्रेस और विधायक द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे भाजपा की छवि धूमिल करने की सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया। डेलू ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संगरिया नगरपालिका अध्यक्ष पद की चुनावी दौड़ में भाजपा का कोई भी अधिकृत प्रत्याशी मैदान में नहीं है। जब पार्टी का कोई उम्मीदवार ही चुनाव में नहीं है, तो ऐसे में रात के घटनाक्रम के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी अंदरूनी खींचतान और विफलताओं को छिपाने के लिए अनावश्यक रूप से भाजपा का नाम घसीट रही है और इस पूरे प्रकरण से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।
उठते सवाल और उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों और आमजन के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, यदि संबंधित पार्षद अपनी स्वेच्छा से होटल में ठहरे हुए थे, तो एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद आधी रात को इतनी बड़ी संख्या में पुलिस टीम भेजने की क्या अनिवार्यता थी? क्या पुलिस प्रशासन किसी बाहरी दबाव में कार्य कर रहा था, या यह केवल परिजनों की गुमशुदगी/अपहरण की शिकायत पर की गई त्वरित कार्रवाई थी? होटल में कथित रूप से इस्तेमाल हुए निजी वाहन और मौके पर मौजूद गैर-पुलिसकर्मियों की क्या भूमिका थी?
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। मांग पत्र में पूरे मामले की उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच कराने, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा करने, महिला पार्षदों के साथ कथित दुर्व्यवहार की स्वतंत्र जांच और यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है तो उसके जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
फिलहाल, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं, बयानों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है, जिसके आधार पर ही आगे की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चुनाव से ठीक पहले उपजे इस विवाद ने संगरिया के राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है।








