








भटनेर पोस्ट डॉट कॉम
हनुमानगढ़ नगर निकाय चुनाव के नतीजों की घड़ी जैसे-जैसे करीब आ रही है, शहर की सियासत का पारा तेजी से चढ़ने लगा है। मतदान समाप्त होने के बाद और मतगणना के निर्णायक 13 घंटों से ठीक पहले एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने सभी दलों के कान खड़े कर दिए हैं। निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। त्रिशंकु परिणाम और खंडित जनादेश की लगातार उड़ती अफवाहों व सट्टा बाजार के आकलनों के बीच इस मुलाकात को महज शिष्टाचार नहीं माना जा रहा। सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि बोर्ड गठन की अंतिम बाजी किसके हाथ लगेगी। इसी गर्माहट के बीच ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ ने विधायक गणेशराज बंसल से सीधे चुनावी समीकरणों, आगामी रणनीतियों और पूर्व मंत्री से इस मुलाकात के असली सियासी मायनों पर विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के संपादित अंश
चुनाव प्रचार का पूरा दौर समाप्त हो चुका है। जमीन पर आपका अनुभव कैसा रहा?
-अनुभव बेहद शानदार और भावुक कर देने वाला रहा। जिस तरह पिछले विधानसभा चुनाव में हनुमानगढ़ की जनता ने मुझ पर भरोसा जताया था, ठीक उसी तरह इस निकाय चुनाव में भी मतदाताओं ने दिल खोलकर प्यार और समर्थन दिया। हर वार्ड, हर मोहल्ले में कार्यकर्ताओं का जोश और आम अवाम का उत्साह देखकर मन अभिभूत हो गया। विपरीत परिस्थितियों में भी हमारी पूरी टीम ने दिन-रात एक करके जो मेहनत की है, वह सचमुच काबिलेतारीफ है। जनता का यह स्नेह ही हमारी असली ताकत है।
शहर भर में कई कयास लग रहे हैं। आपकी नजर में आपका खेमा कितनी सीटों पर जीत दर्ज कर रहा है?
-देखिए, जमीन की हकीकत हवा-हवाई दावों से अलग होती है। हमने हर वार्ड में जनता का मिजाज देखा है। जिस तरह से मतदाताओं का रुझान सीधे तौर पर हमारे समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में दिखा, मुझे अटूट विश्वास है कि हम कम से कम 35 सीटों पर स्पष्ट जीत दर्ज करेंगे। शहर की जनता काम करने वालों के साथ खड़ी है। वैसे भी अब मतगणना में महज कुछ ही घंटों का फासला बाकी है, ईवीएम खुलते ही सारी तस्वीर दूध की तरह साफ हो जाएगी।
लेकिन स्थानीय एग्जिट पोल और सट्टा बाजार त्रिशंकु जनादेश का अंदेशा जता रहे हैं। अगर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो प्लान-बी क्या रहेगा?
-पहली बात तो यह कि मुझे इन अनुमानों पर बिल्कुल यकीन नहीं है। हमें पूर्ण बहुमत मिलने जा रहा है। अगर फिर भी किसी अप्रत्याशित कारणवश हम जादुई आंकड़े से दो-चार सीट पीछे रह जाते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं। मैदान में कई ऐसे गैर-दलीय उम्मीदवार भी हैं जो हमारे सीधे संपर्क में न होते हुए भी मजबूत स्थिति में हैं और जीत रहे हैं। हम उन सभी जीतने वाले निर्दलीयों से संवाद करेंगे। हमारा मकसद शहर का विकास है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि बोर्ड बनाने में किसी तरह की कोई अड़चन आएगी।
मतदान खत्म होते ही आप पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के सियासी मायने क्या निकाले जाएं?
-इसे केवल तात्कालिक सियासत के चश्मे से देखना गलत होगा। चौधरी विनोद कुमार जी मेरे राजनीतिक गुरु हैं। मैंने अपने सार्वजनिक जीवन में जो कुछ भी सीखा और हासिल किया, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान और आशीर्वाद रहा है। राजनीति अपनी जगह है, उसमें हर व्यक्ति की अपनी महत्वाकांक्षाएं होती हैं, यही वजह है कि हम चुनावी मैदान में एक-दूसरे के आमने-सामने भी खड़े होते हैं। लेकिन चुनावी प्रतिस्पर्धा से कभी व्यक्तिगत रिश्ते खत्म नहीं होते। चौधरी साहब और आंटी जी (विजया चौधरी) का स्नेह मुझ पर सदा एक अभिभावक की तरह रहा है। मतदान पूरा होने के बाद मैं केवल उनका आशीर्वाद लेने गया था, और उन्होंने मुझे सदैव की तरह अपना स्नेह दिया।
चुनाव प्रचार के दौरान जब आप घर-घर गए, तो शहरवासियों ने आपके सामने कौन-सी मुख्य समस्याएं रखीं?
-सच कहूं तो लोगों ने मेरे सामने कोई लंबी-चौड़ी शिकायतों की फेहरिस्त नहीं रखी। जो भी बुनियादी समस्याएं जैसे नाली, सड़क, रोशनी या सफाई की सामने आईं, उन्हें हमने पहले ही अपने संकल्प पत्र में प्राथमिकता से शामिल कर लिया है। बोर्ड का गठन होते ही उन पर बिना वक्त गंवाए काम शुरू होगा। प्रचार के दौरान लोगों ने बस एक ही बात कही, ‘विधायक जी, आप पहले मजबूती से बोर्ड बनाओ, समस्याएं तो आप खुद ही हल कर देंगे।’ जनता का यह अटूट भरोसा ही दिखाता है कि वे सिर्फ वादे नहीं, काम चाहते हैं, और इसी भरोसे के बल पर हम जीतने जा रहे हैं।







