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हनुमानगढ़ नगरपरिषद चुनाव में कई वार्ड सामान्य मुकाबले से आगे निकलकर प्रतिष्ठा, राजनीतिक विरासत और गुटीय ताकत की परीक्षा बन गए हैं। विधायक गणेशराज बंसल, भाजपा नेता अमित चौधरी व पीसीसी सदस्य भूपेंद्र चौधरी सहित पूर्व सभापतियों से जुड़े परिवारों की मौजूदगी ने इन सीटों का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कई वार्डों में प्रत्याशियों का दल बदलना भी मुकाबले को रोचक बना रहा है।
हनुमानगढ़ नगरपरिषद चुनाव में हर वार्ड का अपना समीकरण है, लेकिन कुछ सीटें ऐसी हैं जिन पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हुई हैं। इन वार्डों में मुकाबला केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव, परिवार की प्रतिष्ठा, पुराने गढ़ और बदलती निष्ठाओं के बीच भी दिखाई दे रहा है। विधायक गणेशराज बंसल गुट ने कई वार्डों में मजबूत चेहरों और राजनीतिक परिवारों से जुड़े प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है, वहीं भाजपा नेता अमित चौधरी व पीसीसी सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने भी अपनी टीम की प्रतिष्ठा से जुड़ी सीटों पर पूरी ताकत झोंक दी है।

वार्ड 1 को सबसे हॉट सीटों में माना जा रहा है। यह विधायक गणेशराज बंसल और भाजपा नेता अमित चौधरी का वार्ड है। विधायक गुट ने अपने सिपहसालार मनजिंद्र सिंह लेघा को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने दीपक खाती की जगह पंजाबी कार्ड खेलते हुए अपारजोत बराड़ की माता बलविंद्र कौर को टिकट दिया है। विधायक और भाजपा के प्रभाव से जुड़े इस वार्ड में मुकाबला दोनों पक्षों की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है।
वार्ड 2 और 3 में मनोज बड़सीवाल परिवार का सियासी प्रयोग चर्चा में है। पहले मां और पिता को पार्षद बनवा चुके मनोज इस बार खुद वार्ड 2 से और उनकी पत्नी निशा वार्ड 3 से निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। अब देखना यह होगा कि परिवार की राजनीतिक पकड़ मतदाताओं के बीच कितनी मजबूत साबित होती है।
वार्ड 6 में वरिष्ठ नेता बलराज सिंह दानेवालिया की धर्मपत्नी वीरकमल कौर निर्दलीय विधायक गुट से मैदान में हैं। कभी भाजपा के टिकट वितरण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले दानेवालिया का अब विधायक गुट में होना अपने आप में राजनीतिक बदलाव का संकेत है। भाजपा ने युवा चेहरे अनिल सिंह राठौड़ पर भरोसा जताया है।

वार्ड 7 निवर्तमान सभापति सुमित रणवां का वार्ड है। विधायक गुट से जुड़े रणवां के सामने भाजपा ने सुमन देवी को मैदान में उतारा है। वहीं वार्ड 9 में पिछली बार कांग्रेस प्रत्याशी रहे मदन बाघला इस बार विधायक गुट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा के मनप्रीत सिंह सैनी हैं, जो पिछली बार भी उनके सामने निर्दलीय प्रत्याशी थे।
वार्ड 11 विधायक गणेशराज बंसल की पुत्री सोनू बंसल के कारण खासा महत्वपूर्ण हो गया है। विधायक ने अपनी पुत्री को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने बजरंगलाल सैन को टिकट दिया है। ऐसे में यह सीट विधायक के लिए सीधे तौर पर प्रतिष्ठा की परीक्षा मानी जा रही है।
वार्ड 13 में पूर्व पार्षद मंजू रणवां और भाजपा की सुमित्रा पारीक आमने-सामने हैं। सुमित्रा पारीक तेज-तर्रार हिंदूवादी नेता आशीष पारीक की माता हैं। वहीं वार्ड 15 में छह बार पार्षद रह चुकीं पूर्व उपसभापति नगीना बाई सातवीं पारी खेलने की कोशिश में हैं। उनके सामने कांग्रेस की कांता और विधायक गुट के नारायण नायक हैं।

वार्ड 16 में विधायक गुट के गुरदीप बराड़ उर्फ बब्बी अपना गढ़ बचाने के लिए मैदान में हैं। भाजपा ने शिवानी मीना को टिकट दिया है। भाजपा के कमल अग्रवाल की दावेदारी के बाद समझाइश से मामला शांत हुआ, लेकिन अब मुकाबले का परिणाम बब्बी के राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा करेगा।
वार्ड 17 भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां पूर्व सभापति और विधायक की धर्मपत्नी संतोष बंसल का मुकाबला भाजपा के हिमांशु महर्षि से है। इसी तरह वार्ड 18 में पूर्व उपसभापति कालूराम शर्मा की पुत्रवधू रेखा कुमारी विधायक गुट से हैं, जबकि भाजपा ने डॉ. सुमन चावला के परिवार से मीना चावला को मैदान में उतारा है। दोनों राजनीतिक परिवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को खास बना दिया है।

वार्ड 21 में भाजपा नेता महादेव भार्गव की प्रतिष्ठा दांव पर है। शहर की राजनीति में ‘चाणक्य’ के रूप में पहचाने जाने वाले भार्गव के सामने विधायक गुट के सुभाषचंद्र और कांग्रेस के सिद्धार्थ हैं। वार्ड 23 में भाजपा नेता प्रदीप ऐरी की धर्मपत्नी सुनीता ऐरी भाजपा प्रत्याशी हैं। उनके सामने कांग्रेस के साहिल और विधायक गुट के मंगतराम हैं।
वार्ड 28 में पूर्व उपसभापति अनिल खीचड़ कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा के अशोक खींची और विधायक गुट के शुभेंदु सिंह के कारण यहां त्रिकोणीय मुकाबला है। वार्ड 30 में पूर्व कमिश्नर राकेश मेहंदीरत्ता की पत्नी शिमला मेहंदीरत्ता भाजपा प्रत्याशी हैं। उनके सामने विधायक गुट के सुनील ढाका और कांग्रेस के मनमोहन सोनी हैं।
वार्ड 31 में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र पारीक की पत्नी सुनीता पारीक भाजपा प्रत्याशी हैं। विधायक गुट से कई बार पार्षद रह चुके अजमेर सिंह बिल्लू मैदान में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी लखवीर सिंह का नामांकन निरस्त होने से यहां मुकाबले का समीकरण बदल गया है।
वार्ड 42 में कांग्रेस के असलम टाक, भाजपा की विनीता बतरा और विधायक गुट की सपना गर्ग के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। विनीता वरिष्ठ सर्जन डॉ. निशांत बतरा की पत्नी हैं। वार्ड 44 में पिछले चुनाव में कांग्रेस टिकट पर जीतने वाले मुकेश भार्गव इस बार विधायक गुट से हैं। उनके सामने कांग्रेस के लोकेंद्र सिंह भाटी और भाजपा के मानविंद्र हैं।
वार्ड 45 में बिहार मूल के तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। विधायक गुट के बहरू ठाकुर, भाजपा के बबलूदास और कांग्रेस के श्यामदास आमने-सामने हैं। 27 साल से वार्ड की राजनीति में सक्रिय बहरू ठाकुर का राजनीतिक सफर जनता दल से कांग्रेस और अब विधायक गुट तक पहुंचा है। खास बात है कि मिथिला कॉलोनी के नाम से इस बस्ती में बिहार मूल के मतदाताओं की संख्या अधिक है। 1994 में शोभादेवी को पार्षद बनने का मौका मिला। इसके बाद बहरू ठाकुर व उनकी धर्मपत्नी सुनीता ठाकुर ही चुनाव मैदान बाजी मारते रहे। इस बार बीजेपी ने भी बिहार मूल के कार्यकर्ता पर भरोसा किया है जबकि कांग्रेस ने बहरू की जगह श्यामदास को टिकट दिया। इससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
वार्ड 46 में विधायक गुट ने पूर्व सभापति पवन अग्रवाल की पुत्रवधू सोनल अग्रवाल को मैदान में उतारा है। भाजपा की गरिमा चौधरी और कांग्रेस की सरोज देवी उनके सामने हैं। पवन अग्रवाल के निधन के बाद यह चुनाव उनके राजनीतिक परिवार की विरासत से भी जुड़ा नजर आ रहा है।
वार्ड 48 में राजनीतिक पाला बदलने की कहानी दिखाई देती है। निवर्तमान पार्षद अंजना जैन पहले कांग्रेस के सिंबल पर जीतीं, फिर विधायक गुट में गईं और चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गईं। उनके सामने विधायक गुट की मोनिका हैं जो सामाजिक कार्यकर्ता गौतम स्वामी की धर्मपत्नी हैं जबकि कांग्रेस ने जिला मंत्री हरिराम सैनी की पुत्रवधू निशा सैनी को उम्मीदवार बनाया है। यह वार्ड पीसीसी सदस्य भूपेंद्र चौधरी का भी है।
वार्ड 50 और 51 में भी गुटीय समीकरण अहम हैं। वार्ड 50 में पार्षद पति जगदीप विक्की खुद विधायक गुट से मैदान में हैं, जबकि वार्ड 51 में पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप के करीबी रहे सुरेशचंद्र धमीजा अब विधायक गुट के प्रत्याशी हैं। उनके सामने भाजपा के कुलदीप शर्मा और कांग्रेस के अनूप हैं।
वार्ड 55 में दो पूर्व पार्षदों लड्डूराम बावरी और हाकम सिंह के बीच मुकाबला है। वार्ड 57 में पूर्व पार्षद राजेंद्र चौधरी की पत्नी अंजू चौधरी विधायक गुट से हैं और भाजपा की वंदना गौतम तथा कांग्रेस की सतपाल कौर उन्हें चुनौती दे रही हैं। वार्ड 59 में पूर्व पार्षद निरंजन नायक विधायक गुट से हैं, जबकि भाजपा के दुलीचंद और कांग्रेस के जयदेव जोइया मुकाबले में हैं। अंतिम छोर पर वार्ड 60 भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। विधायक ने निवर्तमान पार्षद रूपेंद्र यादव पर फिर भरोसा जताया है। यादव परिवार की राजनीतिक पकड़ पुरानी हैकृरूपेंद्र की मां सुलोचना यादव और चाचा अशोक यादव भी पार्षद रह चुके हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल एक प्रत्याशी का नहीं, बल्कि एक स्थापित राजनीतिक परिवार की पकड़ का भी इम्तिहान है।
कुल मिलाकर इन हॉट सीटों पर मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और विधायक गुट के बीच त्रिकोणीय संघर्ष से आगे बढ़कर प्रतिष्ठा बनाम संगठन, परिवार बनाम प्रत्याशी और पुराने गढ़ बनाम नई चुनौती का रूप ले चुका है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि मतदाताओं के बीच किसका प्रभाव वास्तव में कायम है और किसकी राजनीतिक जमीन खिसक रही है।




