


भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर व्यापक बदलाव के दौर में प्रवेश करने जा रही है। 64 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी होने के बाद अब सरकार आईएएस व आरएएस अधिकारियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुट गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ये सूचियां भी आईपीएस की तरह जंबो हो सकती हैं, जिसमें कई जिलों के कलक्टर, एडीएम, एसडीएम और अन्य अफसरों के बदले जाने की पूरी संभावना है।
बताया जा रहा है कि इस बार तबादलों का पैमाना केवल प्रशासनिक संतुलन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का भी प्रयास होगा। खास तौर पर वे अधिकारी जो जनप्रतिनिधियों से दूरी बनाकर चलते रहे हैं या जिन पर जनसुनवाई और समन्वय को लेकर सवाल उठे हैं, उन पर गाज गिर सकती है। सरकार चाहती है कि फील्ड में बैठे अफसर जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल बनाकर काम करें, ताकि संगठन और सरकार के बीच की दूरी कम हो।
दरअसल, सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष है। राजनीतिक नियुक्तियों में लगातार हो रही देरी और मंत्रिमंडल में लंबे समय से फेरबदल न होने के कारण संगठन के कार्यकर्ताओं, विधायकों और नेताओं में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। सरकार इस असंतोष को दबाने के लिए पहले अपने मंत्रियों और विधायकों को राहत देने के मूड में दिखाई दे रही है।
ऐसे में अफसरशाही में बदलाव को एक तरह का ‘सेफ्टी वाल्व’ माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल कर सरकार यह संकेत देना चाहती है कि जनप्रतिनिधियों की बात सुनी जा रही है और जिन अफसरों के कारण कार्यकर्ताओं या विधायकों को असुविधा हुई, उन्हें हटाया जाएगा। इससे संगठन के भीतर संदेश जाएगा कि सरकार जमीनी फीडबैक को गंभीरता से ले रही है।
सूत्रों का कहना है कि कुछ जिलों में लंबे समय से जमे कलक्टरों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। वहीं कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं जिन्हें बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिलों में भेजे जाने की चर्चा है। इसका सीधा असर जिला स्तर की कार्यशैली, विकास योजनाओं और जनसंपर्क पर पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में केवल एक सूची पर ही मामला खत्म नहीं होगा। मौजूदा हालात को देखते हुए तबादला सूचियों की भरमार रह सकती है। कुल मिलाकर, राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी आने वाले दिनों में सियासत और प्रशासन के बीच नए संतुलन की प्रयोगशाला बनती दिख रही है, जहां हर तबादला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक अर्थ भी रखेगा।








