


भटनेर पोस्ट डेस्क.
हनुमानगढ़ टाउन की सड़कों पर सुबह कुछ अलग ही हलचल थी। हाथों में तख्तियां, चेहरों पर उत्साह और कदमों में अनुशासन। यह कोई आम जुलूस नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए निकली जनचेतना की मजबूत पदयात्रा थी। आरएसएसडीआई राजस्थान चैप्टर के राज्य स्तरीय सम्मेलन आरएसएसडीआई-26 के अवसर पर आमजन में डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रिलाइबल लैब से भव्य जागरूकता रैली निकाली गई। जैसे ही वरिष्ठ चिकित्सकों और अतिथियों ने हरी झंडी दिखाई, शहर ने मानो यह संदेश थाम लिया कि सेहत को टालना नहीं, संभालना है।

रैली का शुभारंभ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पारस जैन, डॉ. बृजेश गौड़, आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. एस. एस. गेट, सचिव डॉ. ऐश्वर्य गुप्ता, डॉ. अमृतपाल सिंह, डॉ. विजय अरोड़ा के साथ-साथ रिलाइबल के संस्थापक दिनेश गुप्ता, डायरेक्टर आशीष गुप्ता, हेमंत गोयल, दिवेश नागपाल, हर्षित सोनी, बलजिन्द्र सिंह, दीपक गोयल, आकाश, सशक्त नारी संस्था की संस्थापक अध्यक्ष मित्ताली अग्रवाल तथा एसकेडी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जी. आर. शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। यह दृश्य खुद में एक संदेश था, जब डॉक्टर, शिक्षाविद्, सामाजिक संगठन और नागरिक एक साथ चलें, तो बदलाव की राह आसान हो जाती है।

रैली में स्कूली विद्यार्थियों, व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। बच्चों के हाथों में रंग-बिरंगी तख्तियां थीं, जिन पर मधुमेह से बचाव, नियमित जांच, संतुलित आहार और व्यायाम जैसे सरल लेकिन प्रभावी संदेश लिखे थे। व्यापारियों और नागरिकों की उपस्थिति ने यह साफ किया कि डायबिटीज किसी एक वर्ग की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज की चुनौती है और समाधान भी सामूहिक प्रयास से ही निकलेगा।

‘समय पर जांच, जीवन रहे सुरक्षित’, ‘नियमित व्यायाम अपनाएं, डायबिटीज दूर भगाएं’, इन नारों ने शहर के माहौल को स्वास्थ्य जागरूकता से भर दिया। रैली केवल चलने का कार्यक्रम नहीं थी; यह चलते-फिरते स्वास्थ्य संवाद का मंच थी। लोग रुककर पढ़ते, सुनते और समझते दिखे। कहीं कोई बच्चे से पूछ रहा था कि तख्ती पर क्या लिखा है, तो कहीं कोई बुजुर्ग नियमित जांच के महत्व पर चर्चा कर रहा था।

आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. एस. एस. गेट ने कहा कि मधुमेह तेजी से फैलने वाली जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, लेकिन जागरूकता और अनुशासित दिनचर्या से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डायबिटीज डराने वाली नहीं, समझदारी मांगने वाली बीमारी है। सही समय पर जांच, भोजन में संतुलन और नियमित गतिविधि यही इसके तीन मजबूत स्तंभ हैं।

सचिव डॉ. ऐश्वर्य गुप्ता ने बताया कि आरएसएसडीआई-26 के अंतर्गत जहां एक ओर चिकित्सकों के लिए वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, वहीं दूसरी ओर आमजन को जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक समाज खुद बीमारी की रोकथाम में भागीदार नहीं बनेगा, तब तक चिकित्सा प्रयास अधूरे रहेंगे। रैली इसी सोच का विस्तार है, ज्ञान को दीवारों से बाहर, सड़कों तक लाना।

वरिष्ठ चिकित्सकों ने रैली के माध्यम से बताया कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, तनावमुक्त जीवनशैली और समय-समय पर जांच से डायबिटीज के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मधुमेह लाइलाज नहीं, बल्कि नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है, बस शर्त इतनी है कि सावधानी समय रहते बरती जाए। नेशनल लैब के संस्थापक दिनेश गुप्ता और रिलाइबल लैब के डायरेक्टर आशीष गुप्ता ने आभार जताया।




