




भटनेर पोस्ट डेस्क.
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण अध्याय माना जाता है आपातकाल। दरअसल, वह आज भी चेतावनी देता है कि सत्ता जब असंतुलित होती है, तो संविधान और नागरिक अधिकार सबसे पहले निशाने पर आते हैं। इसी ऐतिहासिक सच्चाई को केंद्र में रखते हुए हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित राजकीय नेहरू मेमोरियल महाविद्यालय में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘माय भारत मंच’ के तत्वावधान में जिला स्तरीय विकसित भारत युवा संसद-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक’ रहा, जिसमें युवाओं ने संसदीय परंपराओं के अनुरूप तर्कपूर्ण, संतुलित और वैचारिक रूप से सशक्त विचार प्रस्तुत कर लोकतंत्र की जीवंत तस्वीर पेश की।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में संवैधानिक जागरूकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों की समझ और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को सुदृढ़ करना रहा। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से 133 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कर इस मंच पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। प्रतिभागियों ने संविधान की सर्वाेच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र मीडिया, नागरिक स्वतंत्रताओं और सत्ता की जवाबदेही जैसे गंभीर विषयों पर तथ्यात्मक और तार्किक प्रस्तुति दी। संसद जैसी प्रक्रिया, अनुशासन और मर्यादाओं ने कार्यक्रम को वास्तविक लोकतांत्रिक अभ्यास का स्वरूप दिया।

मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित चौधरी ने ‘विजन 2047’ की अवधारणा साझा करते हुए कहा कि सशक्त भारत का निर्माण तभी संभव है जब युवा लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने आपातकाल को लोकतंत्र की परीक्षा बताते हुए चेताया कि इतिहास से सीख लेकर ही भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

प्राचार्य प्रो. रामपाल अहरोदिया ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए ऐसे मंच युवाओं के सर्वांगीण विकास का अवसर हैं, जिनका अधिकतम लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने सफल आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए निर्णायक मंडल और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। शिक्षाविद हरिकृष्ण आर्य ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि आपातकाल जैसे दौर यह सिखाते हैं कि अधिकारों की रक्षा के लिए सजग नागरिक होना अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल आलोचक नहीं, बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाले नागरिक बनें।

कार्यक्रम में कंप्यूटर विभाग के पंकज मिश्रा ने मानवाधिकारों के संरक्षण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक के युग में जिम्मेदार संवाद लोकतंत्र की नई चुनौती है। नोडल अधिकारी किरण दिल्ल ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा की सराहना की और माय भारत मंच के माध्यम से निरंतर रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया।

पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रोहित स्वामी ने युवाओं को नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग की सलाह दी, जबकि तहसीलदार नौरंगदेसर भावना शर्मा ने बेहतर पठन संस्कृति विकसित करने को लोकतांत्रिक समझ का आधार बताया।
निर्णायक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार गोपाल झा, राजकीय कन्या महाविद्यालय नोहर की प्राचार्य सरोज न्यौल तथा एनएसएस के जिला समन्वयक डॉ. विनोद खुड़ीवाल शामिल रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को आलोचनात्मक दृष्टि विकसित करने, तथ्यों की शुद्धता बनाए रखने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन हेतु प्रेरित किया। निर्णायकों ने स्पष्ट किया कि असहमति भी लोकतंत्र की ताकत है, बशर्ते वह मर्यादा और तर्क के साथ व्यक्त की जाए।

प्रतियोगिता के आधार पर राज्य स्तरीय युवा संसद के लिए शीर्ष पांच प्रतिभागियों का चयन किया गया। प्रथम स्थान पर लविना जैन (एम.ए. अर्थशास्त्र), द्वितीय समीक्षा शेखावत (एम.एससी. रसायन शास्त्र), तृतीय पूजा, चतुर्थ कुसुम नाथ तथा पंचम स्थान पर अर्पण-जोत रहे। चयनित प्रतिभागियों की प्रस्तुति में विषय की गहराई, संवैधानिक समझ और प्रभावी अभिव्यक्ति स्पष्ट झलकी।

नेहरू युवा केंद्र प्रभारी रीना केसरिया ने सभी प्रतिभागियों को माय भारत पोर्टल की गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में शिक्षाविद् सीएस राघव, डॉ. अर्चना गोदारा आदि मौजूद थे। कुल मिलाकर, यह युवा संसद केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पाठशाला साबित हुई, जहां अतीत के सबक, वर्तमान की समझ और भविष्य की जिम्मेदारी एक साथ दिखाई दी।






