



भटनेर पोस्ट डेस्क.
राजस्थान की अफसरशाही में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो पद से नहीं, अपने रवैये से याद रखे जाते हैं। हनुमानगढ़ जिले के जयसिंह बेनीवाल उन्हीं विरले अफसरों में हैं, जिनके लिए ईमानदारी नौकरी का नियम नहीं, जीवन का स्वभाव रही। 35 साल की सेवा, 104 तबादले, निलंबन, माफिया से टकराव और सत्ता की नाराज़गीकृसब झेलने के बाद भी उनकी आवाज न तब कमजोर हुई, न खरी। रिटायरमेंट के 15 साल बाद भी बेनीवाल आज सिस्टम की उन दरारों पर उंगली रखते हैं, जहां बाकी लोग चुप्पी साध लेते हैं। यही वजह है कि वे सिर्फ पूर्व तहसीलदार नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ का ‘सिटी स्टार’ माने जाते हैं, जो आज भी सच बोलने की कीमत चुकाने को तैयार है।

हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र में रामगढ़िया गांव के पास स्थित 10 जेजीडब्ल्यू क्षेत्र के मूल निवासी जयसिंह बेनीवाल उन विरले अफसरों में शुमार रहे हैं, जिनकी पहचान उनकी बेदाग छवि और स्पष्टवादिता से बनी। तहसीलदार पद से सेवानिवृत्त हुए जयसिंह बेनीवाल ने करीब 35 वर्षों की सरकारी सेवा में वह रास्ता चुना, जो आसान नहीं था, लेकिन आत्मसम्मान से भरा था।
साल 1975 में भूगोल विषय में एमए करने के बाद 1976 में जिलेदार भर्ती में चयनित हुए जयसिंह बेनीवाल की पहली नियुक्ति रावतसर में हुई। जमीन, नहर और राजस्व जैसे जटिल विभागों से जुड़ी यह सेवा शुरुआत से ही चुनौतियों से भरी रही। 1997 में वे पदोन्नत होकर डिप्टी कलक्टर बने और बाद में तहसीलदार सेवा में समायोजित किए गए। इस दौरान उन्होंने नायब तहसीलदार के रूप में भी सेवाएं दीं। बेनीवाल ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से कहते हैं कि सरकारी सेवा में रहते हुए संघर्ष कभी कम नहीं रहा। तत्कालीन मंत्री देवी सिंह भाटी के समय उनके ‘मनमाफिक गलत काम’ नहीं करने के आरोप में उन्हें बेवजह निलंबन झेलना पड़ा। साल 1998 में उनकी पदस्थापना हनुमानगढ़ में हुई और दिसंबर 2010 में वे पल्लू से सेवानिवृत्त हुए।

35 साल की नौकरी में करीब 104 तबादले झेलना अपने आप में सिस्टम की तस्वीर बयान करता है। बेनीवाल इसे ईमानदारी की कीमत मानते हैं। उन्होंने कभी समझौते का रास्ता नहीं चुना। सिंचाई विभाग में नहर निर्माण के दौरान घटिया सामग्री के इस्तेमाल का मामला सामने आया तो उन्होंने चीफ इंजीनियर के खिलाफ टिप्पणी कर सीधे हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर दी। उनका मानना है कि गलत देखकर चुप रहना भी अपराध है।

भादरा में नायब तहसीलदार रहते हुए जयसिंह बेनीवाल का नाम मिलावटखोरों के लिए खौफ बन गया। नकली बीज और खाद के खिलाफ उन्होंने अभियान छेड़ा। उस दौर के जिला कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर उनके कामकाज से परिचित थे, इसलिए तमाम शिकायतों और दबावों के बावजूद उन्हें कार्रवाई की पूरी छूट मिली। नतीजा यह रहा कि वे जनता के बीच एक ईमानदार और निर्भीक अफसर के रूप में पहचाने जाने लगे।

पल्लू में पदस्थापन के दौरान उन्होंने जिप्सम माफिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस लड़ाई में कई पटवारियों ने भी उनका साथ दिया। बेनीवाल कहते हैं, ‘बेईमानी देखकर आत्मा रोती है। चुप नहीं रहा जाता।’ यही सोच उन्हें बार-बार सिस्टम से टकराने के लिए मजबूर करती रही। रिटायरमेंट के 15 साल बाद भी जयसिंह बेनीवाल की आवाज कमजोर नहीं पड़ी है। दोनों आंखों से ठीक से देख न पाने के बावजूद वे आज भी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हैं। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भजनलाल सरकार को अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार तक कह दिया।

वे कहते हैं कि वे जनसंघ की विचारधारा से प्रेरित रहे हैं। आज उसी विचारधारा की सरकारें सत्ता में हैं, लेकिन भ्रष्टाचार को देखकर मन व्यथित हो जाता है। भादरा क्षेत्र में नहर निर्माण में खुलेआम भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए वे कहते हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप और मिलीभगत से सब कुछ हो रहा है।

एक जिला कलेक्टर से शिकायत करने पर जब सवाल किया गया कि ‘जब कोई और नहीं बोलता तो आप अकेले क्यों बोलते हो’, तो बेनीवाल का उत्तर साफ था, ‘मेरे बाप-दादा ने यह गांव बसाया है, हम इसे इस तरह लुटते नहीं देख सकते।’
जयसिंह बेनीवाल आज भी उसी जिद और ईमानदारी के साथ खड़े हैं। वे किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज अब भी सिस्टम को असहज कर देती है। शायद यही वजह है कि वे सिर्फ एक पूर्व अफसर नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ के ‘सिटी फेस’ के रूप में पहचाने जाते हैं।


