भटनेर पोस्ट पॉलिटिकल डेस्क.
सियासी संयोग कहिए कि साल 1990 में दो नए चेहरे चुनाव मैदान में उतरे। जिला मुख्यालय के भगत सिंह चौक पर नेशनल क्लीनिक का संचालन करने वाले डॉ. रामप्रताप और सियासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले चौधरी विनोद कुमार।
इससे पूर्व दोनों के पास पंचायतीराज का अनुभव था। विधानसभा चुनाव में वे दोनों ही पहली बार मैदान में उतरे थे। चौधरी विनोद कुमार के पास कांग्रेस का टिकट था और डॉ. रामप्रताप बेटिकट थे यानी निर्दलीय। परिणाम आया तो डॉ. रामप्रताप 13 हजार 981 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे। लेकिन उन्हें 19 हजार 266 वोट हासिल हुए थे।
अब साल 1993 का चुनाव आया। डॉ. रामप्रताप बीजेपी प्रत्याशी थे। उन्हें 47 हजार 436 वोट मिले जबकि कांग्रेस के चौधरी विनोद कुमार को 33 हजार 611 वोट मिले। इस तरह डॉ. रामप्रताप 13 हजार 825 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए और न सिर्फ पहली बार विधानसभा पहुंचे बल्कि भैरोसिंह शेखावत सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री भी ने। इसके बाद साल 2003 से लेकर 2018 तक दोनों ही चुनावी मैदान में आमने-सामने हुए।

