


भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है। घटते एलपीजी स्टॉक को देखते हुए तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर अघोषित रोक लगा दी है। एजेंसियों को स्पष्ट संदेश भेजकर नए कॉमर्शियल ऑर्डर नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं और फिलहाल केवल घरेलू उपयोग के सिलेंडरों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है। इस फैसले से उद्योगों, होटल-रेस्टोरेंट, ढाबों और कैटरिंग कारोबार पर सीधा असर पड़ना तय है। हालात यह हैं कि मार्च-अप्रैल के शादी सीजन से पहले ही गैस संकट की आहट सुनाई देने लगी है।
तेल कंपनियों के ‘सब कुछ सामान्य’ होने के दावों के बीच ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि अगले आदेश तक कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई थमी हुई है। गैस एजेंसी संचालक बताते हैं कि कई एलपीजी डीलर्स को कंपनियों की ओर से संदेश मिला है कि मौजूदा हालात को देखते हुए व्यावसायिक गैस की सप्लाई रोक दी जाए। जिन एजेंसियों के पास सीमित स्टॉक है, उन्हें नया ऑर्डर लगाने से भी मना कर दिया गया है। नतीजा यह कि होटल-रेस्टोरेंट और औद्योगिक इकाइयां पसोपेश में हैं, काम कैसे चले और खर्च कैसे संभले।

एक्सपर्ट के मुताबिक, मार्च और अप्रैल में राजस्थान में शादियों का जोर रहता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है, तो गैस की किल्लत और बढ़ सकती है। भारत अपनी गैस जरूरतों का करीब 80 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें कतर और ईरान सहित अन्य देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। मौजूदा हालात में सप्लाई बाधित रहने की आशंका ने बाजार की धड़कन बढ़ा दी है। कॉमर्शियल गैस के बिना बड़े पैमाने पर शादी समारोहों में खाना बनाना मुश्किल हो सकता है, यह बात कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोग खुलकर कह रहे हैं।
यह संकट केवल हनुमानगढ़ तक सीमित नहीं है। समूचे राजस्थान में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। राज्य के 10 प्रमुख बॉटलिंग प्लांट्स में स्टॉक बेहद कम रह गया है। नतीजतन घरेलू उपभोक्ताओं की बुकिंग 25 दिन बाद के लिए खुल रही है। पहले जहां सिलेंडर 2दृ3 दिन में मिल जाता था, अब हफ्तों का इंतजार आम बात हो गई है। यह इंतजार सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की रसोई के लिए बड़ा इम्तिहान बन गया है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि सीमित स्टॉक और बढ़ी हुई मांग के कारण बॉटलिंग प्लांट्स पर दबाव बढ़ा है। मार्च में आमतौर पर मांग सामान्य से अधिक रहती है, लेकिन उत्पादन और आपूर्ति में बाधा आने से हालात बिगड़ गए। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह असंतुलन कुछ समय तक बना रह सकता है।
सरकारी विभागों का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। एलपीजी वितरक कंपनियां भी कह रही हैं कि वे अतिरिक्त इंतज़ाम में जुटी हैं, लेकिन मौजूदा उत्पादन क्षमता और सीमित स्टॉक के चलते तुरंत राहत देना आसान नहीं है। व्यवस्था के स्तर पर चुनौती यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि आम घरों की रसोई बंद न हो, वहीं कारोबार भी पूरी तरह ठप न पड़े।
बेतरतीब बुकिंग या अतिरिक्त भंडारण से बचें, इससे सप्लाई चेन पर और दबाव पड़ता है। सिलेंडर का मितव्ययी उपयोग करें, फालतू जलने से बचाएं, प्रेशर कुकर और ढक्कन का इस्तेमाल बढ़ाएं। जिनके पास वैकल्पिक साधन (इंडक्शन/इलेक्ट्रिक कुकर) हैं, वे अस्थायी रूप से उनका सहारा लें। होटल और कैटरिंग सेक्टर पूर्व योजना बनाकर काम करें, ताकि अचानक संकट न आए।




