



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
विधायक गणेशराज बंसल ने शासन व्यवस्था के तौर-तरीकों को लेकर विधानसभा में एक अहम मुद्दा उठाया। हनुमानगढ़ विधायक गणेशराज बंसल ने विधानसभा में विशेष उल्लेख प्रस्ताव संख्या 295 के माध्यम से टारगेट आधारित गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी दल की सरकार हो, लेकिन गवर्नेंस के नाम पर केवल टारगेट पूरे करने की परंपरा चल पड़ी है, जिससे लोकहितकारी गवर्नेंस धरातल पर नजर नहीं आती।

प्रस्ताव में बंसल ने कहा कि टारगेट आधारित गवर्नेंस हर विभाग में हावी हो चुकी है। चाहे पुलिस विभाग हो, आबकारी विभाग हो, वाणिज्यिक कर विभाग या कोई अन्य विभाग। हर जगह केवल लक्ष्य आधारित काम हो रहा है। इसके कारण शासन का असली उद्देश्य, यानी जनता को वास्तविक राहत और सुशासन देना, पीछे छूटता जा रहा है। गवर्नेंस के नाम पर केवल आंकड़े प्रदर्शित करने वाली रिपोर्टें तैयार की जा रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

उन्होंने पुलिस थानों में कार्रवाई के आंकड़ों को टारगेट से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अपराध नियंत्रण को भी लक्ष्य की तरह देखा जाएगा तो इसका अर्थ यह निकलता है कि हम अपराध रोकने में असफल हो चुके हैं। इसी तरह वाणिज्यिक कर संग्रह के टारगेट का मतलब यह हुआ कि कर चोरी को रोकने के बजाय केवल वसूली के आंकड़े बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

गणेशराज बंसल ने अपने प्रस्ताव में कहा कि एक ओर निजी कॉर्पाेरेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर भविष्य की जरूरतों का सटीक अनुमान लगाने और बेहतर निर्णय लेने की दिशा में काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र अब भी पुरानी और जड़ व्यवस्था के आधार पर टारगेट बेस्ड गवर्नेंस चला रहा है। यह व्यवस्था राज्य को फिर से औपनिवेशिक प्रशासनिक सोच की ओर ले जा रही है, जहां शासन का उद्देश्य सेवा नहीं बल्कि आंकड़ों की पूर्ति बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि टारगेट आधारित गवर्नेंस का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। व्यापारियों पर दबाव बढ़ रहा है, पुलिस कार्रवाई को संख्या से मापा जा रहा है और प्रशासनिक फैसले गुणवत्ता की बजाय मात्रात्मक उपलब्धियों पर आधारित हो गए हैं। इससे न तो अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है और न ही आर्थिक पारदर्शिता को मजबूती मिल पा रही है।

प्रस्ताव के अंत में बंसल ने सभापति के माध्यम से सदन से आग्रह किया कि राज्य सरकार शासन व्यवस्था को तकनीक आधारित, प्रभावी और परिणामोन्मुख गवर्नेंस मॉडल की ओर ले जाए। उन्होंने रियल टाइम और डेटा आधारित गवर्नेंस अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि निर्णय वास्तविक परिस्थितियों और जमीनी जरूरतों के अनुरूप लिए जा सकें।
उल्लेखनीय है कि यह विशेष उल्लेख प्रस्ताव राजस्थान विधान सभा के प्रमुख सचिव को संबोधित किया गया है और संबंधित मंत्री के रूप में भजन लाल शर्मा का नाम दर्ज है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में शासन सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता की बहस को और तेज कर सकता है।






