



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित धान मंडी में चल रही किसान महापंचायत के दौरान बुधवार को आंदोलन ने एक निर्णायक मोड़ लिया। मंच से उठती मांगों और नारों के बीच प्रशासन ने संवाद का रास्ता चुना। जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव का संदेश लेकर सीनियर आरएएस अधिकारी भवानी सिंह पंवार, संगरिया एसडीएम जय कौशिक और टिब्बी एसडीएम सत्यनारायण सुथार महापंचायत स्थल पहुंचे और किसान नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलक्टर कार्यालय के लिए रवाना हुआ। किसान प्रतिनिधिमंडल में रघुवीर वर्मा, जगजीत सिंह जग्गी, रेशम सिंह, मंगेज चौधरी, मदन दुर्गेसर, रवि जोसन, नितिन ढाका, बलजिंद्र सिंह, संदीप मान, मान सिंह, संदीप, गगनदीप, सुभाष गोदारा और रविंद्र सिंह शामिल थे। कलेक्ट्रेट में किसान प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच दो दौर की लंबी और गंभीर वार्ता हुई।

प्रशासन की ओर से एडीजी बीजू जॉर्ज जोसफ, शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर, आईजी हेमंत शर्मा, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, पूर्व जिला कलक्टर कानाराम, जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव, पुलिस अधीक्षक हरि शंकर, एडीएम उम्मेदीलाल मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वार्ता की शुरुआत में ही किसान प्रतिनिधियों ने अपनी दो प्रमुख मांगें स्पष्ट रूप से रख दीं। पहली, राठीखेड़ा में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के एमओयू को रद्द किया जाए। दूसरी, आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।

शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि किसानों की भावनाओं को देखते हुए फिलहाल एथेनॉल प्लांट का निर्माण कार्य एक बारगी रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले की जांच और समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे का निर्णय लेगी और किसान प्रतिनिधियों को उससे अवगत कराया जाएगा।

इस पर किसान नेताओं ने सरकार से तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझाने के बजाय जनभावनाओं को समझने की अपील की। किसानों का कहना था कि सिर्फ निर्माण कार्य रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एमओयू रद्द करने पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए। वहीं मुकदमे वापस लेने के मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है और इसके लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
किसान प्रतिनिधि इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। लंबी चर्चा के बाद यह सहमति बनी कि फिलहाल स्थानीय पुलिस को इन मामलों में दखल देने से रोका जाएगा, ताकि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही, इन मुकदमों की जांच सीआईडी सीबी को सौंपने पर दोनों पक्षों में सहमति बनी। इस तरह दोनों मांगों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

वार्ता के दौरान किसान नेताओं ने आपस में परामर्श करने की इच्छा जताई। इस पर प्रशासनिक अधिकारी सभागार से बाहर चले गए। कुछ देर बाद दूसरे दौर की वार्ता शुरू हुई। इसमें इस बात पर सहमति बनी कि जिला प्रशासन दोनों प्रमुख बिंदुओं, एमओयू रद्द करने और मुकदमे वापस लेने के मामले पर राज्य सरकार को शासकीय पत्र लिखेगा और लोकहित में निर्णय लेने का आग्रह करेगा।

इस सहमति के तुरंत बाद जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को शासकीय पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया और उसकी प्रति किसान प्रतिनिधियों को सौंप दी। किसान प्रतिनिधि पत्र और सहमति की प्रति लेकर वापस महापंचायत स्थल पहुंचे। जब मंच से किसानों को वार्ता के नतीजों की जानकारी दी गई तो उपस्थित किसानों ने करतल ध्वनि के साथ इसे स्वीकार किया। इसके साथ ही धान मंडी में चल रही किसान महापंचायत समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।
हालांकि, किसानों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनका शांतिपूर्ण धरना टिब्बी में जारी रहेगा। किसान नेताओं ने प्रशासन और सरकार को दो टूक शब्दों में कहा कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। सरकार को 20 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में यदि किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 7 जनवरी को संगरिया में फिर से किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस तरह दिनभर चले तनाव, सुरक्षा और वार्ताओं के बीच किसान आंदोलन फिलहाल स्थगित हुआ, लेकिन मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और आने वाले 20 दिनों के फैसलों पर टिकी हुई हैं।



