






भटनेर पोस्ट खेल डेस्क.
भारतीय हॉकी के सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा का जश्न सात नवंबर को हनुमानगढ़ में उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। राजीव गांधी स्टेडियम में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम हॉकी राजस्थान के कोषाध्यक्ष एवं हॉकी हनुमानगढ़ के अध्यक्ष मलकीत सिंह मान के नेतृत्व में हुआ। उन्होंने बताया कि भारत ने हॉकी के इतिहास में जो स्वर्णिम अध्याय रचा है, वह पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। भारतीय हॉकी टीम ने अब तक 8 ओलंपिक स्वर्ण, 1 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर खेल इतिहास में अपना वर्चस्व स्थापित किया है। मलकीत सिंह मान ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और गौरव का पर्व है, हॉकी की एक सदी पूरी हो चुकी है और अब नया युग शुरू होने को तैयार है।’

कार्यक्रम के सचिव हरवीर सिंह ने बताया कि भारतीय हॉकी की शताब्दी के उपलक्ष्य में हनुमानगढ़ में पुरुष और महिला दोनों वर्गों के रोमांचक मुकाबले आयोजित किए गए। पुरुष वर्ग में भटनेर हॉकी और स्टार हॉकी हनुमानगढ़ के बीच मुकाबला खेला गया, जिसमें स्टार हॉकी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-0 से जीत दर्ज की। दूसरी ओर महिला वर्ग में खालसा हॉकी क्लब और मालवा हॉकी के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें मालवा हॉकी ने 2-0 से शानदार जीत हासिल की। मैदान पर खिलाड़ियों के उत्साह और दर्शकों की तालियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया।

शताब्दी समारोह के दौरान हॉकी हनुमानगढ़ और मालवा हॉकी अकादमी की ओर से जिले के पूर्व खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय हॉकी के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में खिलाड़ियों के साथ केक काटकर जश्न मनाया गया और उन्हें सम्मान पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। यह पल उन सभी पूर्व खिलाड़ियों के लिए भावनात्मक था जिन्होंने अपने संघर्ष और समर्पण से जिले और राज्य को गौरवान्वित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सभापति सुमित रणवा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा अधिकारी हनुमानगढ़ जितेंद्र बठला उपस्थित रहे। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में कई वरिष्ठ राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी और खेल जगत की प्रतिष्ठित हस्तियाँ मौजूद थीं। इनमें पूर्व पुलिस अधीक्षक नरेंद्र पाल सिंह, हॉकी कोच इकबाल सिंह, गुरदीप सिंह, दर्शन सिंह संधू, निर्मल सिंह, अमरजीत गोदारा, अरविंद पाल सिंह सोढ़ी, मस्तान सिंह, नसीब सिंह गुलाब भदरा, गौरव भारद्वाज, दीपक सहारण, मनजोत सिंह, राजपाल सिंह, निशांत कौशिक, विनोद कुमार और ओम सेन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन सभी ने भारतीय हॉकी के गौरवमयी इतिहास और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा देने वाली कहानियों को साझा किया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय हॉकी केवल खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, जज्बे और टीम भावना की मिसाल है।

मलकीत सिंह मान ने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि भारत ने हॉकी के मैदान में कैसे विश्वभर में अपना परचम लहराया। आज का यह दिन हमें उन महान खिलाड़ियों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश का नाम रोशन किया और कठिन परिस्थितियों में भी खेल को जिंदा रखा।

मुख्य अतिथि जितेंद्र बठला ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं में खेल भावना को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने हॉकी हनुमानगढ़ और मालवा हॉकी अकादमी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयाँ छू रहा है, तब ऐसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर नई प्रतिभाओं को मंच मिलता है। यह सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरित करने का माध्यम है।

पूर्व खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में कई भावुक पल देखने को मिले। पूर्व खिलाड़ी गुरदीप सिंह और अमरजीत गोदारा ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष और हॉकी के प्रति समर्पण की कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि पहले संसाधनों की कमी के बावजूद खिलाड़ियों ने अपने जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता बनाया। कार्यक्रम के अंत में हरवीर सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह शताब्दी समारोह सिर्फ अतीत की उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि आने वाले सौ वर्षों के लिए नई ऊर्जा का संचार है।

हनुमानगढ़ में आयोजित यह आयोजन खेल प्रेमियों के लिए एक यादगार दिन बन गया। मैदान में युवा खिलाड़ियों के खेल प्रदर्शन ने दिखाया कि हनुमानगढ़ की धरती पर हॉकी का भविष्य उज्जवल है। जैसे भारत ने पिछली सदी में हॉकी के मैदान पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया, वैसे ही नई पीढ़ी अब उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। भारतीय हॉकी की शताब्दी का यह उत्सव हनुमानगढ़ में न केवल खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना, बल्कि यह याद दिलाने वाला दिन भी रहा कि जुनून और मेहनत से इतिहास रचा जा सकता है। आज का दिन इस बात का प्रमाण है कि सौ साल पुरानी इस परंपरा में अब भी वही जोश, वही गर्व और वही भारतीय आत्मा धड़क रही है।




