


एमएल शर्मा.
लगातार टी 20 विश्वकप भारतीय झोली में। सूर्या ब्रिगेड ने खेल के मैदान में कई मिथक तोड़ते हुए आसमान में जीत का परचम लहरा दिया। पहले धुआंधार बल्लेबाजी, फिर दमदार गेंदबाजी और साथ में जबरदस्त क्षेत्ररक्षण। यकीनन, खेल के हर क्षेत्र में उम्दा-लाजवाब प्रदर्शन। नतीजन, भारतीय शेरों ने लगातार दूसरी बार टी 20 विश्वकप जीतकर एक नया कीर्तिमान रच दिया। रविवार यानी 8 मार्च को न्यूजीलैंड के साथ अहमदाबाद में खेले गए फाइनल मुकाबले में एक ऐसा कारनामा हुआ जिसकी गूंज समूचे विश्व में सुनाई दी। हिंद के लड़कों ने क्रिकेट विश्वकप के फाइनल मुकाबले में ‘कीवियों’ को करारी शिकस्त देकर टी 20 वर्ल्ड कप तीसरी बार अपने नाम किया। भारतीय शेर जमकर दहाड़े और लीजिए जनाब, ‘दुनियां हमारी मुट्ठी में।’
यह महज एक जीत ही नहीं बल्कि नया इतिहास रचने वाला मैच रहा। भारत तीन टी 20 विश्वकप जीतने वाली पहली टीम बनी, लगातार दो बार जीतने वाली एवं होम ग्राउंड में जीतने वाली भी पहली टीम बन गई। पूरे टूर्नामेंट में कई रिकॉर्ड टूटे, नए बने। लेकिन सबका असर सकारात्मक और भारतीय क्रिकेट को नई पहचान। सबसे पहले एमएस धोनी की कप्तानी में 2007, रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 और अब सूर्यकमार यादव की कप्तानी में वर्ल्डकप पर हिंदुस्तानी हाथ।
गौर कीजिए, यह जीत महज एक ट्रॉफी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रबंधन, बीसीसीआई की ताकत, फैन कल्चर, खेल की अर्थव्यवस्था सब कुछ दर्शाती है। ‘सूर्या सेना’ ने 96 रनों से जीत हासिल कर वाकई ‘कमाल’ कर दिखाया। ओपनर संजू सैमसन ने 89 रन तो अभिषेक शर्मा ने 52 रन तेजी से बनाकर ‘आर्यावर्त’ के ‘इरादे’ जाहिर कर दिए।
ईशान के 54 रन, हार्दिक के 18 रन और शिवम दुबे के 8 गेंदों में ताबड़तोड़ 26 रनों की बदौलत भारतीय टीम ने विश्वकप फाइनल में आज तक का सर्वाेच्च स्कोर बना दिया। भारत से जीतने के लिए न्यूजीलैंड को 256 रन का लक्ष्य मिला। जवाब में बूम बूम बुमराह की घातक बोलिंग ष्कीवियोंष् के स्टंप्स उखाड़ती रही। साथ ही अक्षर पटेल ने 3 विकेट लेकर विपक्षी टीम की कमर ही तोड़ दी। जहां एक तरफ भारत ने पावरप्ले में 92 रन बनाकर भयंकर दवाब बनाया वहीं न्यूजीलैंड पावरप्ले में 3 विकेट खोकर सिर्फ 52 रन ही बना सकी। इससे उबरना दूर की कौड़ी साबित हुआ। जसप्रीत बुमराह को ष्प्लेयर ऑफ मैचष् व संजू सैमसन को ‘प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट’ के खिताब से नवाजा गया।
इनाम में इंडियन टीम को 27.50 करोड़ व न्यूजीलैंड को 15 करोड़ रुपए मिले।
इससे पहले ग्रैमी अवॉर्ड विजेता रिकी मार्टिन, सुखविंदर सिंह व फाल्गुनी पाठक की तिकड़ी ने संगीतमय प्रस्तुतियां दी।
जीत के साथ ही पूरा देश झूम उठा। जमकर खुशियां मनाई गई, आतिशबाजी का दिलकश नजारा देखने को मिला। फाइनल मैच ऐसा रहा जो ‘आँकड़ों’ में नहीं वरन, ‘असर’ में याद रखा जाएगा। भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 5 विकेट पर 255 रन बनाए। जवाब में न्यूजीलैंड टीम 159 रनों पर सिमट गई। भारत 96 रन से विजेता बना। भारतीय टीम का जुनून, फील्डिंग और गेंदबाजी न्यूजीलैंड पर भारी पड़ा।
इस टीम की असली धरोहर क्या है? यह जीत केवल 15 खिलाड़ियों की नहीं, यह भारत की स्पोर्ट्स कल्चर में बदलाव की शुरुआत है। अब भारतीय टीम सिर्फ खेलती ही नहीं बल्कि सिर्फ जीतती है।
होली के बाद हिन्दुस्तान जगमगा गया है। देशभर में पटाखे फोड़े गए, रात के समय क्रिकेट प्रेमी नाच कर खुशियां जाहिर कर रहे थे। हालांकि, सफर इतना माकूल नहीं रहा पर संघर्ष के बल पर सपनों की उड़ान को हकीकत की मंजिल मयस्सर हो गई। हमारा प्यारा हिंदुस्तान जिसके लिए जीत कोई ‘विकल्प’ नहीं बल्कि ‘परंपरा’ है। वाह! दिल बाग बाग है। सेल्यूट।







