




डॉ. एमपी शर्मा.
जब आंखों में पीलापन दिखे, त्वचा पीली पड़ने लगे और पेशाब का रंग गहरा हो जाए, तो समझ लीजिए कि शरीर भीतर से कुछ संकेत दे रहा है। यह संकेत है, पीलिया का। लेकिन ध्यान रखिए, पीलिया कोई रोग नहीं है, यह लक्षण है, किसी गहरे रोग का, खासकर लिवर से जुड़ी समस्या का। पीलिया तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पीले रंग का रसायन सामान्य से अधिक मात्रा में जमा हो जाता है। यह बिलीरुबिन हमारे शरीर में पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनता है। आमतौर पर लिवर इसे शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन जब लिवर या पित्त नलियों में कोई गड़बड़ी हो, तो यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, और शरीर पीला दिखने लगता है।
पीलिया के प्रकार, दो अहम श्रेणियां
ऑब्स्ट्रक्टिव पीलिया, बहाव में रुकावट: जब लिवर से पित्त बाहर नहीं निकल पाता, तब यह पीलिया होता है। इसके मुख्य कारण हैं, पित्त की थैली में पथरी, पित्त नली में सूजन या स्टोन, अग्न्याशय (पैंक्रियास) का कैंसर, कोलेडोकल स्टोन या कोलेंजियोकार्सिनोमा, लिवर में फैले हुए अन्य कैंसर (मेटास्टेसिस)। यह स्थिति अक्सर सर्जिकल हस्तक्षेप की मांग करती है।
नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव पीलिया, लिवर की कार्यक्षमता में कमी: जब लिवर खुद ही सही तरीके से काम नहीं करता, तब यह पीलिया होता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, वायरल हेपेटाइटिस, हेपेटाइटिस ए और ई, दूषित पानी या भोजन से, हेपेटाइटिस बी और सी, संक्रमित खून या यौन संबंध से, अल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस अत्यधिक शराब सेवन से, ड्रग-इंड्यूस्ड हेपेटाइटिस कुछ दवाइयों का दुष्प्रभाव, ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस जब शरीर की इम्यून प्रणाली लिवर को ही नुकसान पहुंचाने लगे।

लक्षणों पर गौर करें
आंखों और त्वचा का पीला होना, गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल, थकान और कमजोरी, बुखार (संक्रमण की स्थिति में), पेट में दर्द या सूजन (विशेषकर ऑब्स्ट्रक्टिव पीलिया में), शरीर में खुजली (जब पित्त त्वचा में जमा हो जाए)। पीलिया का सटीक निदान करना जरूरी है, ताकि सही कारण जानकर उपचार हो सके। आमतौर पर डॉक्टर निम्नलिखित जांचें करवाते हैं, ब्लड टेस्ट-बिलीरुबिन, एसजीपीटी, एसजीओटी, वायरल मार्कर-हेपेटाइटिस की पहचान के लिए, अल्ट्रासाउंड/सीटी स्कैन/एमआरआई-पित्त थैली, नलियों और अग्न्याशय की स्थिति जांचने के लिए, ईआरसीपी-डायग्नोसिस के साथ-साथ इलाज का जरिया, लिवर बायोप्सी-जब रोग का कारण स्पष्ट न हो।
कारण पर निर्भर है इलाज
नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव पीलिया, भरपूर आराम और पोषण, हेपेटाइटिस ए और ई- सामान्यतः समय के साथ ठीक हो जाते हैं, हेपेटाइटिस बी और सी, विशेष एंटीवायरल दवाइयों की जरूरत। शराब और हानिकारक दवाओं से परहेज, ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस, स्टेरॉइड्स द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
ऑब्स्ट्रक्टिव पीलिया
यदि पित्त नली में स्टोन हो, ईआरसीपी या सर्जरी द्वारा निकाला जाता है। कैंसर या ट्यूमर की स्थिति में, ऑपरेशन, कीमोथैरेपी या स्टेंटिंग। पित्त नली में रुकावट, स्टेंट डालकर बहाव सुचारु किया जाता है।
आम जनता के लिए उपयोगी सुझाव
स्वच्छ जल का सेवन करें, उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीएं। बाहरी भोजन या खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों से बचें। लिवर फंक्शन टेस्ट नियमित कराएं, विशेषकर जोखिम वाले लोगों को शराब और सेल्फ-मेडिकेशन से परहेज करें। हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण जरूर करवाएं। पीलिया के कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अंत में, हमारा लिवर बिना शिकायत किए लगातार काम करता है। शरीर का मौन योद्धा। पीलिया उसकी एकमात्र पुकार है, जिसे अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। सही समय पर इलाज और जीवनशैली में थोड़ा सुधार लाकर पीलिया से पूरी तरह उबरा जा सकता है। याद रखें, पीली आंखें सिर्फ रंग नहीं बतातीं, वे शरीर के भीतर चल रही हलचल का इशारा देती हैं।
-लेखक आईएमए राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष हैं




