




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान की प्रशासनिक मशीनरी एक बार फिर आंतरिक टकराव के घेरे में है। जैसलमेर कलेक्टर प्रताप सिंह और आरएएस अधिकारियों के बीच बढ़ता विवाद राज्य की ब्यूरोक्रेसी में दरार की गंभीर चेतावनी दे रहा है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) एसोसिएशन ने कलेक्टर के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर उन्हें हटाने व अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो समस्त आरएएस अधिकारी सामूहिक हड़ताल पर जाएंगे।
क्या है मामला?
विवाद की जड़ में हैं पोकरण के पूर्व एसडीएम प्रभजोत सिंह गिल, जिन्होंने कलेक्टर प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक, कलेक्टर ने उन्हें एक सूदखोर कंपनी (एनएस फाइनेंस) के खिलाफ कार्रवाई न करने और एक सोलर कंपनी (अप्रावा एनर्जी) के पक्ष में विशेष निर्णय देने का दबाव बनाया। गिल का दावा है कि कलेक्टर ने उन्हें मजिस्ट्रेट पावर छीनने तक की धमकी दी। गिल द्वारा कार्मिक विभाग को भेजे गए पत्र को आरएएस एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन के साथ संलग्न किया है। इसके अनुसार 27 अप्रैल को कलेक्टर ने गिल को जैसलमेर बुलाकर अपने कक्ष में दो विवादास्पद मामलों में ‘फेवर’ करने का निर्देश दिया। जब गिल ने आपत्ति जताई तो कलेक्टर ने कथित तौर पर टिप्पणी की ‘तुम जज बनने लायक नहीं हो’, जो एक आरओ मीटिंग में सार्वजनिक रूप से कही गई।
प्रशासनिक गरिमा पर सवाल
इस विवाद ने एक बार फिर आईएएस और आरएएस के बीच लंबे समय से चले आ रहे पद, प्रतिष्ठा और अधिकारों के संघर्ष को सतह पर ला दिया है। जहां आरएएस अधिकारी खुद को ज़मीनी स्तर पर निर्णय लेने वाला कार्यपालक मानते हैं, वहीं आईएएस अधिकारी कई बार उनकी भूमिका को सीमित करने की कोशिश करते देखे जाते हैं। जैसलमेर का यह प्रकरण उस तनातनी का जीवंत उदाहरण बन गया है। सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत टकराव का संकेत दे रहा है। यदि आरएएस एसोसिएशन अपनी चेतावनी पर अमल करती है और सामूहिक अवकाश या हड़ताल पर जाती है, तो राज्य में प्रशासनिक कार्य पूरी तरह से ठप हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, यदि आईएएस एसोसिएशन कलेक्टर प्रताप सिंह के पक्ष में उतरती है, तो यह मामला आईएएस बनाम आरएएस की लड़ाई में तब्दील हो जाएगा।





