





रोहित अग्रवाल.
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया आयकर पोर्टल पर शुरू हो चुकी है। इस बार कुल सात प्रकार के आईटीआर फॉर्म निर्धारित किए गए हैं, जिनमें से आईटीआर1, आईटीआर2, आईटीआर.3 और आईटीआर.4 आमतौर पर व्यक्तिगत करदाताओं के लिए सबसे उपयुक्त हैं। इस वर्ष आयकर विभाग ने आईटीआर भरने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2025 तय की है, जो पहले 31 जुलाई हुआ करती थी। फॉर्मों की देरी से उपलब्धता के चलते यह समय सीमा बढ़ाई गई है।
किसे भरना आवश्यक है आईटीआर
निम्नलिखित मामलों को छोडकर, सभी प्रकार के करदाताओं के लिए आयकर विवरणी भरना आवश्यक है। वह व्यक्ति जिसकी आय 75 वर्ष या अधिक है और वह निम्नलिखित शर्तें पूरी करता है। आय का स्रोत केवल पेंशन और बैंक ब्याज है। ब्याज की आय बैंक में ही जमा होती है। व्यक्ति ने बैंक में घोषणा पत्र जमा किया है। यह प्रावधान आयकर अधिनियम 1961 की धारा 194पी के अंतर्गत आता है। ऐसे करदाता जिनकी कुल आय कर छूट की सीमा से अधिक है, उन्हें भी आईटीआर भरना अनिवार्य है, चाहे कर की राशि शून्य ही क्यों न हो।

उपलब्ध आईटीआर फॉर्म
आईटीआर 1 सहज (वेतन, पेंशन, एक मकान से किराया, ब्याज से आय, दिर्घकालीन पूंजीगत लाभ 1.25 तक (कुल ₹50 लाख तक की आय)।
आईटीआर 2 पूंजीगत लाभ, एक से अधिक मकान, विदेशी आय।
आईटीआर 3 व्यवसाय या पेशे से आय वाले व्यक्ति।
आईटीआर 4 सुगम प्रिज़म्पटिव टैक्स स्कीम 44एडी, 44एडीए, 44एई अपनाने वाले (कुल ₹50 लाख तक की आय)।

क्यों जरूरी है आईटीआर
भविष्य में लोन लेने, वीज़ा आवेदन, टेंडर में भागीदारी, या सरकारी अनुदान के लिए आईटीआर आवश्यक दस्तावेज़ बन गया है। यदि अधिक टी.डी.एस. कटौती हुई है तो उसका रिफण्ड लेेने के लिए, अधिभार और ब्याज से बचने के लिए समय पर फाइलिंग जरूरी है। यदि देरी से फाइल करते हैं तो धारा 234 एफ के तहत ₹1000 से ₹5000 तक का जुर्माना भी लग सकता है।
आईटीआर भरते समय गलत छूट न लें, वरना आ सकती है मुसीबत
कई बार करदाता बिना समुचित जानकारी के छूट जैसे (धारा 80सी, 80डी, एचआरए आदि) का दावा कर देते हैं, जबकि उनके पास उसका वैध प्रमाण या पात्रता नहीं होती। इससे आयकर विभाग को शक हो सकता है और फिर आपकी आईटीआर स्क्रूटनी में जा सकती है, विभाग नोटिस भेज सकता है, आपको छूट का प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ सकता है, यदि प्रमाण नहीं हुआ तो जुर्माना और ब्याज लग सकता है।

उदाहरण
एचआरए का दावा किया लेकिन मकान मालिक का पेन नहीं दिया। धारा 80सी, 80जी में फर्जी निवेश दिखा दिया। मेडिकल इंश्योरेंस का बिल नहीं, फिर भी 80डी की छूट ले ली।
क्या करे ?
केवल उन्हीं छूटों का दावा करें जिनके साक्ष्य आपके पास हों। फॉर्म 16, मेडिकल बिल, निवेश प्रूफ, बैंक स्टेटमेंट आदि पहले से संभाल कर रखें। किसी भी छूट या आय के स्रोत को छुपाएं नहीं।
हर करदाता को चाहिए कि वह अपनी आय की प्रकृति और स्थिति के अनुसार सही आईटीआर फॉर्म का चयन कर समयसीमा से पहले आयकर रिटर्न फाइल करे। अगर संदेह हो, तो किसी कर सलाहकार या सीए से संपर्क अवश्य करें।
-लेखक जाने-माने कर सलाहकार व टैक्स बार एसोसिएशन हनुमानगढ़ के अध्यक्ष हैं, आईटीआर से संबंधित जानकारी के लिए एडवोकेट रोहित अग्रवाल के मो. 9001650155 पर संपर्क किया जा सकता है


