




भटनेर पोस्ट पॉलिटिकल डेस्क.
कांग्रेस की राजनीति फिर बदलती दिखी। संगठन में हलचल स्पष्ट नजर आई। राजस्थान में पार्टी ने 45 जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दिए। यह बड़ा संकेत माना जा रहा। इसी क्रम में हनुमानगढ़ की कमान मनीष मक्कासर को सौंप दी गई। वे जिला परिषद के डायरेक्टर हैं और प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव। अब जिला संगठन पूरी तरह उनके नेतृत्व में आगे बढ़ेगा।

मनीष के परिवार का राजनीति में पुराना नाता है। विरासत का असर उनके व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखाई देता है। दादा हरिराम मक्कासर सांसद रह चुके। ताऊ शोपत सिंह चार बार विधायक और एक बार सांसद भी रहे। पिता बलराम मक्कासर वामपंथी राजनीति के समर्पित नेता थे। माता भी सरपंच रह चुकी हैं। भाई राजेंद्र मक्कासर जिला प्रमुख रहे। घर में राजनीति हमेशा सक्रिय रही। इसी माहौल में मनीष का बचपन और राजनीतिक समझ दोनों विकसित हुईं।

जिलाध्यक्ष पद हेतु 42 आवेदन आए। कड़ी प्रतिस्पर्धा थी और कई चेहरे दौड़ में मौजूद। कांग्रेस ने जातीय संतुलन, उम्र और सक्रियता को प्रमुख आधार माना। निष्ठा और संगठन से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण माना गया। सूत्र बताते हैं कि प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और जिलाध्यक्ष सुरेंद्र दादरी दोनों का समर्थन मनीष को मिला। यह समर्थन उनकी दावेदारी को मजबूती प्रदान करता रहा। समीकरण स्पष्ट थे और संकेत स्पष्ट। पार्टी ने आखिर उनपर भरोसा जताया। आलाकमान भी संतुष्ट दिखाई दिया निर्णय से इस बार।

जिलाध्यक्ष बनने पर मनीष ने ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से कहा, ‘ पार्टी आलाकमान ने जो विश्वास जताया है, इस पर खरा उतरना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। मैं पांचों विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने का प्रयास करूंगा। वरिष्ठ नेताओं संग इस काम को आगे बढ़ाएंगे। देवतुल्य कार्यकर्ताओं को साथ लेकर ही पार्टी को फिर संयोजित करने की योजना बनाएंगे और उन्हें मूर्त रूप प्रदान करेंगे।’

सियासी तौर पर देखें तो आने वाले पंचायत और निकाय चुनाव मनीष मक्कासर के लिए असली परीक्षा क्षेत्र साबित होंगे। कांग्रेस चाहती है कि संगठन की जड़ें फिर मजबूत हों इस जिले में आने वाले वर्षों के भीतर। मक्कासर परिवार की स्थानीय पकड़ पार्टी के लिए पूंजी साबित हो सकती है। मनीष की नियुक्ति संगठन को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही। यह कदम केवल औपचारिक बदलाव नहीं। यह रणनीतिक संकेत भी माना जाएगा।

हनुमानगढ़ में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हमेशा तेज रही है पहले। अब मुकाबला और दिलचस्प बन सकता है। कांग्रेस की कोशिश अब जमीन पर सक्रिय नेतृत्व लाना और बूथ स्तर तक पकड़ बढ़ाना। नया जिलाध्यक्ष यदि प्रभावी ढंग से टीम बनाता है तो चुनावी माहौल बदला जा सकता। विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान की राजनीति हमेशा अप्रत्याशित मोड़ लेती रही है। यह नियुक्ति भी एक नया अध्याय खोलती दिखाई देती है। आने वाले दिनों में इस फैसले का राजनीतिक असर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।




