




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
घग्घर नदी में अचानक पानी की मात्रा बढ़ने से प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। मंगलवार, 26 अगस्त को विभिन्न हैड्स और बैराजों पर पानी का स्तर बढ़ा हुआ दर्ज किया गया। आंकड़ों के मुताबिक गुल्लाचिक्का में 13,860 क्यूसेक, खनौरी में 6,875 क्यूसेक, चांदपुर में 5,350 क्यूसेक, ओटू हैड पर 5,300 क्यूसेक, घग्घर साइफन पर 6,960 क्यूसेक, नाली बैड पर 4,000 क्यूसेक, आरडी 42 जीडीसी पर 2,850 क्यूसेक, आरडी 133 जीडीसी पर 200 क्यूसेक और एसओजी ब्रांच में 1,500 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है। हालांकि इन आंकड़ों के बावजूद प्रशासन और जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।

जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड अभियंता सहीराम यादव ने ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से कहा, ‘घग्घर में पानी की मात्रा जरूर बढ़ रही है, लेकिन इससे हनुमानगढ़ और आसपास के इलाकों में खतरे की कोई आशंका नहीं है। जब तक गुल्लाचिक्का में पानी का स्तर 40 हजार क्यूसेक से ऊपर नहीं जाता, तब तक बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनती। फिलहाल 13,860 क्यूसेक पानी चल रहा है, जो बेहद कम है।’

सहीराम यादव ने कहा कि घग्घर में पानी की आवक पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। यदि बारिश अधिक हुई तो पानी की मात्रा बढ़ सकती है और यदि बारिश कम हुई तो पानी स्वतः घट जाएगा।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यही कारण है कि प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि 15 सितंबर तक घग्घर में पानी की मात्रा बढ़ने की संभावना बनी रहती है। अक्सर देखा गया है कि जून से अगस्त तक पानी अपेक्षाकृत कम रहता है, जबकि सितंबर में अचानक आवक बढ़ सकती है।

यादव के अनुसार, ‘अभी जिस तरह मानसून करवट ले रहा है, बारिश की संभावना जरूर है, लेकिन घग्घर बेल्ट में फिलहाल खतरे की कोई बात नहीं है। प्रशासन और विभागीय टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं।’

घग्घर के आसपास रहने वाले लोग पानी बढ़ने की हर खबर पर सतर्क हो जाते हैं। वजह है अतीत की घटनाएं। तीन साल पहले पानी की मात्रा अचानक बढ़ने पर अफरातफरी मच गई थी। उस वक्त हालात इतने बिगड़ गए थे कि सेना तक को बुलाने की नौबत आ गई थी, हालांकि अंततः खतरा टल गया।

काबिलेगौर है, साल 1995 में घग्घर ने हनुमानगढ़ जंक्शन क्षेत्र में जबरदस्त तबाही मचाई थी। उस विभीषिका की यादें आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में ताजा हैं। खेत, घर और रास्ते सब पानी में डूब गए थे। इसी वजह से जैसे ही घग्घर में पानी का स्तर बढ़ता है, लोग चौकन्ने हो जाते हैं।

हनुमानगढ़ प्रशासन ने संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और सिंचाई विभाग लगातार जलस्तर का आकलन कर रहा है। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासनिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

सहीराम यादव जैसे विशेषज्ञ भी आश्वस्त कर रहे हैं कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी तरह का खतरा नहीं है। फिर भी, यदि मानसून ने रुख बदला और पानी की मात्रा तेजी से बढ़ी तो प्रशासन के पास हर आपात स्थिति से निपटने की योजना मौजूद है।



