




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
मानसून की रफ्तार के साथ चारों ओर बाढ़ जैसी स्थिति है। नदियाँ और नाले उफान पर हैं, मगर राजस्थान के किसानों के खेत सूख रहे हैं। विरोधाभास यही है कि जिस पौंग डैम से पानी राजस्थान तक आता है, उसमें भरपूर जल उपलब्ध है। यहां से एक लाख क्यूसेक पानी पाकिस्तान की ओर छोड़ा जा रहा है, लेकिन राजस्थान के किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिल रहा। हालात यह हैं कि खेतों में आग सुलगने लगी है और किसानों के सब्र का बांध टूटने को है।

किसानों का कहना है कि पौंग डैम में इस समय जलस्तर लगभग 1380 फीट है और करीब एक लाख क्यूसेक पानी की आवक भी हो रही है। हरिके बैराज से राजस्थान कैनाल में 13,795 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में चार समूह बनाकर एक समय में दो समूहों की बारी चलाना संभव है, क्योंकि इतनी मात्रा का पानी पर्याप्त है। किसानों का तर्क है कि जब भी चार समूह की बारी चलाई जाती है, तो हरिके से 12,500 से 12,900 क्यूसेक पानी दिया जाता रहा है। दशकों से यही परंपरा चली आ रही है। फिर अचानक इस बार तीन समूहों में बारी क्यों बांटी गई?

किसानों ने खुलकर आरोप लगाए हैं कि यह पूरा विवाद जल संसाधन विभाग के हनुमानगढ़ के चीफ इंजीनियर की वजह से है। उनका कहना है कि वही अधिकारी अपनी मर्जी से प्रस्ताव बनाकर सीएडी (कैनाल एरिया डेवलपमेंट) कमिश्नर को भेजते हैं। पंजाब और बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) का राजस्थान की बारियों पर कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। यहां तक कि संभागीय आयुक्त और सीएडी आयुक्त जैसे आईएएस अधिकारियों की भी नहीं सुनी जाती। कमिश्नर सिर्फ मजबूरी में उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर आदेश जारी करते हैं। किसानों ने व्यंग्य किया कि अगर सब कुछ चीफ इंजीनियर ही तय करता है, तो फिर सरकार कमिश्नर से हस्ताक्षर क्यों कराती है।

किसान नेता विशनाराम सियाग ने इसे ‘बड़ी साजिश’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रस्ताव किसने और किसके कहने पर बनाया। इसके पीछे छिपे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सियाग का आरोप है कि यह किसानों के साथ मजाक है। जब पानी नहीं था, तब भी किसानों को तीन समूह की बारी दी गई और अब जब डैम लबालब है और पाकिस्तान को पानी दिया जा रहा है, तब भी राजस्थान के किसानों से भेदभाव किया जा रहा है।

पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि पौंग डैम से पाकिस्तान की ओर एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि राजस्थान के किसानों को मात्र तीन समूहों में पानी देना खुली साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी और सरकार में बैठे लोग किसानों के हक पर कुठाराघात कर रहे हैं। भाटी ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत निर्णय नहीं बदला गया और किसानों को चार समूह की बारी नहीं दी गई तो सोमवार को कलेक्ट्रेट के सामने धरना होगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन को बड़ा रूप देने से किसान पीछे नहीं हटेंगे।

किसानों के बढ़ते आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच प्रशासन भी सक्रिय हुआ। संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को तलब किया। अफसरों ने सफाई दी कि सोमवार को बीबीएमबी की टेक्निकल कमेटी की बैठक होनी है। उसके बाद चार समूह की बारी पर निर्णय लिया जाएगा। अंदरखाने से खबर है कि अब दो समूहों को एक साथ पानी देने की संभावना बढ़ गई है, जिससे किसानों की नाराजगी कुछ हद तक कम हो सकती है।

दरअसल, किसानों का रोष अचानक नहीं फूटा। फरवरी माह में पानी पूरी तरह बंद कर दिया गया था, तब भी किसानों ने चुपचाप सहन किया। लेकिन अब जब डैम में प्रचुर जल उपलब्ध है और पाकिस्तान को खुलकर पानी दिया जा रहा है, तब राजस्थान के किसानों को पर्याप्त आपूर्ति से वंचित करना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यही कारण है कि इस बार किसान आंदोलन की राह पर उतरने को तैयार हैं। गांव-गांव से किसानों की आवाज उठ रही है। किसान संगठनों का कहना है कि पानी को लेकर अब समझौता नहीं किया जाएगा। ‘हमारे हिस्से का पानी हमें चाहिए’ यह नाराज किसानों की गूंज है। अगर सोमवार को बैठक में किसानों की मांग पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है और यह मुद्दा सरकार के लिए चुनौती बन जाएगा।

