





शंकर सोनी.
वर्तमान में ऑनलाइन जुआ बहुत बड़ी समस्या है। भारतीय गेमिंग स्टार्टअप्स को 2021 में 100 करोड़ रुपए से अधिक निवेश मिला। इसके लिए कई प्लेटफ़ॉर्म्स परिचालित हैं। कुल 400 से अधिक कंपनियाँ जुआ के खेल में सक्रिय हैं। भारत में ऑनलाइन जुआ पर कोई केंद्र सरकार द्वारा लागू या समन्वित कानून नहीं था। अंग्रेजों के जमाने से भारत में जुआ से संबंधित एक ही कानून पब्लिक गेंबलिंग एक्ट 1867” लागू है। चूंकि ‘दाव और द्यूत’ राज्य सूची का मामला होने के कारण इस पर राज्य सरकार ही कानून बना सकती है। स्वतंत्रता के बाद कुछ राज्यों ने पब्लिक गेंबलिंग एक्ट 1867” को लागू किया ।

न्यायालयों ने अक्सर 1968 में दिए गए सर्वाेच्च न्यायालय के फैसले को आधार बनाते हुए ‘कौशल बनाम संयोग’ के आधार पर निर्णय दिए हैं। लेकिन ऑनलाइन खेलों में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने होता है, वहाँ पारंपरिक ‘कौशल और संयोग’ के परीक्षण को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सरकार को इन कंपनियों से 18 फीसद जीएसटी राजस्व मिलने के कारण सरकार भी चुप्पी साधे हुए है।

आज लगभग 75 करोड़ स्मार्टफोन उपयोगकर्ता देश में हैं यदि ऑन लाइन जुआ पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो नुकसान और खतरनाक रूप ले सकता है। हालांकि भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 में संगठित अवैध शर्त और जुआ खिलवाने सजा का प्रावधान है। पर इस धारा के अंतर्गत पुलिस कार्यवाही लगभग शून्य है।

ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 इस मामले में एक नया अध्याय बनेगा। यह विधेयक 20-21 अगस्त 2025 में लोक सभा और राज्य सभा दोनों में पारित किया गया, और अब राष्ट्रपति की स्वीकृति की प्रतीक्षा है। इस विधेयक में जुए के रियल-मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा और ऑन लाइन जुआ का परिचालन, प्रचार, विज्ञापन, लेन-देन भी बंद होगा । नए कानून के अनुसार ऑनलाइन गेमिंग, नेशनल ई स्पोर्ट्स ऑर्थाेरिटी की स्थापना होगी जो गेम्स को मनी गेम या ई स्पोर्ट व सोशल गेम’ में वर्गीकृत करेगा।

नए कानून में ऑनलाइन मनी गेम्स के संचालन के लिए 3 साल तक जेल और/या ₹1 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकता है। विज्ञापन/प्रमोशन के लिए 2 साल तक जेल और/या ₹50 लाख जुर्माना।मनी गेम्स के लिए भुगतान पर 3 साल जेल और/या ₹1 करोड़ जुर्माना। इन अपराधों की पुनरावर्ती पर सजा 3-5 साल और जुर्माना ₹2 करोड़ लगाया जा सकता है। नए कानून में ऑनलाइन जुआ संबंधित अपराधों में पुलिस मुकदमा दर्ज बिना वारंट तलाशी लेने, सीज करने तथा अपराधी को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा ।

एक तरफ सरकार का मानना है कि यह बिल युवा संरक्षण, वित्तीय सुरक्षा, और डिजिटल स्वास्थ्य के लिए जरूरी था।
पीएम मोदी ने इसे भारत को डिजिटल मनोरंजन और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर बताया है। दूसरी तरफ इस जुए के धंधे में लगे लोग चिंतित हैं। अब देखना नया कानून ऑन लाइन जुए पर शिकंजा कसेगा या अनाज सटे की तरह सरकारी सट्टा बनकर किसी मंत्री की सम्पदा बनेगा।
-लेखक नागरिक सुरक्षा मंच के संस्थापक व वरिष्ठ अधिवक्ता हैं




