






भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
घग्घर नदी में पानी का बहाव इन दिनों लगातार तेज होता जा रहा है और इसके साथ ही खतरे की आहट भी गहराती जा रही है। कई स्थानों पर नदी में पानी का बहाव चिंताजनक स्तर पर दर्ज किया गया। गुल्लाचिक्का हेड पर 4600 क्यूसेक, खनौरी में 2500, चांदपुर में 2350, ओटू हेड पर 1300, घग्घर साइफन में 3400 और नाली बेड में 3000 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा था। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत हैं कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो 8 से 10 दिनों के भीतर यह पानी पाकिस्तान सीमा तक पहुंच सकता है।
घग्घर नदी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र से प्रवेश करती है और वहां से अनूपगढ़ होते हुए करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय कर पाक सीमा की ओर अग्रसर होती है। पिछले अनुभवों के अनुसार, पानी को यह दूरी तय करने में 8 से 10 दिन लगते हैं, यदि बीच में कोई बड़ा अवरोध उत्पन्न न हो। नदी में जलस्तर का यह क्रमिक और तीव्र बढ़ाव न सिर्फ भूगोलिक संकट को जन्म दे रहा है, बल्कि जनसुरक्षा और प्रशासनिक तत्परता की भी परीक्षा ले रहा है।

श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी लापरवाही
हनुमानगढ़ टाउन के समीप स्थित प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर के पास बना कॉजवे (छोटा पुल) इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। नदी के उफनते जल ने अब इस पुल को छूना शुरू कर दिया है। जलधारा में भारी मात्रा में बहकर आ रही झाड़ियां और जलकुंभी (स्थानीय भाषा में ‘केली’) से जल प्रवाह अनियंत्रित हो गया है। प्रशासन ने मशीन लगाकर केली हटाने का कार्य तो शुरू किया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद श्रद्धालु इस पुल से आना-जाना जारी रखे हुए हैं।
कॉजवे की रेलिंग टूट चुकी है, जो इसे न पैदल चलने लायक छोड़ती है, न किसी वाहन के लिए सुरक्षित। इसके बावजूद सुरक्षा बंदोबस्त नदारद हैं। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता यदि शीघ्र ही कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया।


बेरिकेडिंग और सुरक्षा की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि कॉजवे के दोनों ओर तुरंत प्रभाव से बेरिकेडिंग की जाए और आमजन के आवागमन पर पाबंदी लगाई जाए। इसके साथ ही होमगार्ड्स या पुलिसकर्मियों की स्थायी तैनाती की मांग भी उठ रही है ताकि श्रद्धालुओं को खतरों से समय रहते सचेत किया जा सके।
सवाल यह है कि जब मौसम विभाग और जल संसाधन विभाग पहले ही घग्घर के उफान की चेतावनी दे चुके थे, तब सुरक्षा प्रबंधों में यह ढील क्यों बरती गई? प्रशासन की यह लापरवाही एक बड़ी मानवीय त्रासदी का कारण बन सकती है।
टिब्बी क्षेत्र में प्रशासन सतर्क, तटबंधों की निगरानी तेज
मानसून में अत्यधिक वर्षा और घग्घर नदी में पानी की अधिक आवक की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने टिब्बी क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण की व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। घग्घर नदी के किनारे बने तटबंधों की निगरानी के लिए इन्हें 11 कार्यखंडों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक खंड में तीन-तीन कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई है। ये कार्मिक जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग से समन्वय बनाकर तटबंधों की सतत निगरानी कर रहे हैं।

तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया है, जिनमें तहसीलदार हरीश टाक, नायब तहसीलदार पतराम गोदारा, सूर्य स्वामी और विकास अधिकारी श्याम सुंदर मूंड प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये अधिकारी न केवल नियमित भ्रमण कर रहे हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों से भी सतत संवाद बनाए हुए हैं।
इंसीडेंट कमांडर एवं उपखंड अधिकारी सत्यनारायण सुथार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम (फोनरू 01539-234123) को दी जाए और सभी प्रभारी अधिकारी अपनी रिपोर्ट समय-समय पर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं।




